अनुबंध कर्मचारियों के हक में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार का एक्ट रद्द
शिमला: हिमाचल प्रदेश में अनुबंध कर्मचारियों से जुड़े अहम मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को झटका दिया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की सीनियोरिटी और सेवा शर्तों से जुड़े एक्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
यह एक्ट सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था। हालांकि, इसे अदालत में चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने जनवरी में फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाते हुए न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने एक्ट को रद्द कर दिया।
अदालत ने देवेंद्र कुमार बनाम राज्य मामले (CWP-3361/2025) में यह फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को उनकी नियुक्ति की तारीख से ही सीनियोरिटी और अन्य सेवा लाभ दिए जाएं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ, जिसकी अगुवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव कर रहे थे, इसी एक्ट को रद्द कर चुकी थी। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट भी गई, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बाद सरकार ने दिसंबर 2024 में धर्मशाला में हुए शीतकालीन सत्र में नया विधेयक पास किया था।
विवाद की जड़ यह थी कि सरकार द्वारा लाए गए एक्ट में अनुबंध कर्मचारियों को उनकी पूर्व अवधि (बैक डेट) के लाभ से वंचित रखा गया था। अलग-अलग समय में नियमितीकरण की अवधि (8 साल, 5 साल, 2 साल) बदलने के कारण कर्मचारियों की सीनियोरिटी को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
अब हाईकोर्ट के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों को राहत मिली है और उन्हें नियुक्ति की तारीख से लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, यह निर्णय राज्य सरकार के लिए बड़ा कानूनी और राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।












