सोलन MC केस में नया मोड़: अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव के आदेश पर लगाई रोक
सोलन: हिमाचल प्रदेश में अवैध निर्माण को लेकर एक अहम मामले में हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शिमला स्थित हाईकोर्ट ने सोलन नगर निगम से जुड़े विवाद में मुख्य सचिव संजय गुप्ता के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्होंने MC कमिश्नर द्वारा दिए गए ध्वस्तीकरण आदेश को निरस्त कर दिया था। कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद मामला एक बार फिर कानूनी और प्रशासनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद सोलन के जवाहर पार्क क्षेत्र में खसरा नंबर 127/128 पर किए गए निर्माण से जुड़ा है। नगर निगम सोलन के अनुसार यह निर्माण नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध तरीके से किया गया है। इसी आधार पर 28 मार्च 2024 को MC कमिश्नर ने निर्माण को गिराने के आदेश जारी किए थे।
हालांकि, इस आदेश के खिलाफ अपील मुख्य सचिव संजय गुप्ता के पास पहुंची, जो उस समय टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थे। 24 फरवरी 2026 को उन्होंने अपीलकर्ताओं की दलीलों को सही मानते हुए MC कमिश्नर के आदेश को रद्द कर दिया और निर्माण को अनुमति दे दी। अपीलकर्ताओं का दावा था कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही किया जा रहा है और नगर निगम द्वारा की गई पैमाइश गलत है।
हाईकोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
मामले को गंभीर मानते हुए नगर निगम सोलन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जस्टिस ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मामले में नियमों की अनदेखी की आशंका है। इसी के चलते अदालत ने मुख्य सचिव के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
साथ ही हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, डीसी सोलन और एसडीएम सोलन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद निर्माण को लेकर स्थिति फिर से अनिश्चित हो गई है। यह मामला अब प्रशासनिक फैसलों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच टकराव का उदाहरण बनता जा रहा है।
आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित निर्माण वैध है या अवैध। अदालत का अंतिम फैसला न केवल इस केस की दिशा तय करेगा, बल्कि प्रदेश में अवैध निर्माण के मामलों पर भी बड़ा असर डाल सकता है।












