आमों से लदे पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, धर्मपुर में फिर गूंजा अवैध कटान का मामला
कांढा पतन मंदिर परिसर में प्रूनिंग की आड़ में बड़े पेड़ों के कटान के आरोप, एसडीएम पर भी उठे सवाल
रितेश चौहान, अनंत ज्ञान, सरकाघाट
धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर कथित अवैध कटान को लेकर सुर्खियों में आ गया है। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कांढा पतन स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में आम से लदे बड़े-बड़े पेड़ों के कटान को लेकर विवाद गहरा गया है। हिमालय इकोरुट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विधि चंद भरमौरिया ने इस पूरे मामले को अमानवीय बताते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन की सरपरस्ती में प्रतिबंधित किस्म के पेड़ों पर आरा चलाया गया और प्रूनिंग की आड़ में पेड़ों को जड़ से काट दिया गया।
उन्होंने कहा कि जब पेड़ों पर असंख्य आम लगे हुए थे तब उन्हें काट दिया गया, जिससे धार्मिक आस्था, पर्यावरण और कानून तीनों की धज्जियां उड़ी हैं। भरमौरिया ने आरोप लगाया कि मंदिर कमेटी के चेयरमैन स्वयं एसडीएम धर्मपुर हैं और 28 अप्रैल 2026 को बीएनएनएस की धारा 152 के तहत जारी आदेश में केवल तीन पेड़ों की कांट-छांट की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर पेड़ पूरी तरह कटे मिले। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेड़ पहले से मौजूद थे तो उनके नीचे सराय निर्माण क्यों कराया गया और मंदिर कमेटी के सचिव को शिकायतकर्ता बनाकर अनुमति क्यों ली गई।
उनका कहना है कि यह पूरा मामला मिलीभगत की ओर इशारा करता है तथा इसकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, अन्यथा जनता के सहयोग से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
भरमौरिया ने यह भी आरोप लगाया कि धर्मपुर क्षेत्र में प्रूनिंग के नाम पर हजारों पेड़ काटे गए हैं और एसडीएम कार्यालय धर्मपुर का पूरा रिकॉर्ड जब्त कर जांच होनी चाहिए कि अब तक कितनी प्रूनिंग की अनुमति दी गई।
उन्होंने दावा किया कि वन परिक्षेत्र कार्यालय के समीप सैकड़ों वर्ष पुराने तुनी के पेड़ों को भी इसी तरह खुर्द-बुर्द किया गया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पहले भी मंदिर कमेटी द्वारा पेड़ों के कटान में गोलमाल किया गया और लकड़ी से हुई आय का कोई स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया।
प्रूनिंग की आड़ में हजारों पेड़ों के कटान का आरोप
समाजसेवी विधि चंद भरमौरिया ने आरोप लगाया कि धर्मपुर क्षेत्र में प्रूनिंग के नाम पर बड़े स्तर पर पेड़ों का कटान किया गया है। उन्होंने मांग उठाई कि एसडीएम कार्यालय धर्मपुर का रिकॉर्ड सीज कर निष्पक्ष जांच करवाई जाए ताकि यह सामने आ सके कि अब तक कितने पेड़ों की छंटाई की अनुमति दी गई और कितने पेड़ वास्तव में काटे गए। उनका कहना है कि विपक्ष भी इस मुद्दे को उठा चुका है और कई स्थानों पर पुराने पेड़ों को कथित तौर पर खुर्द-बुर्द किया गया है।
मैं चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त हूं, वन विभाग को जांच के निर्देश दिए थे : एसडीएम
धर्मपुर के एसडीएम जोगेंद्र पटियाल ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इन दिनों चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे और विभाग ने मौके पर जाकर आवश्यक कार्रवाई की होगी।






