हिमाचल एंट्री टैक्स विवाद फिर भड़का, पंजाब से आए लोगों का चक्का जाम; BJP विधायक भी धरने पर बैठे
बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। बिलासपुर के श्री नैना देवी क्षेत्र में इस मुद्दे पर प्रदर्शन, चक्का जाम और राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है, जहां एक ओर लोग टैक्स बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं, वहीं भाजपा और कांग्रेस के नेता इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं।
बिलासपुर के देहनी क्षेत्र के पास शनिवार को पंजाब से आए लोगों ने एंट्री टैक्स के विरोध में चक्का जाम कर दिया। इस प्रदर्शन के चलते सड़क पर लंबा जाम लग गया और आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक टैक्स पर पुनर्विचार नहीं होगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
भाजपा विधायक भी धरने पर बैठे
प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक डॉ। जनक राज भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया, लेकिन सरकार अपने फैसले पर कायम है। उन्होंने इसे जनता के हित के खिलाफ बताया।
'टैक्स में लगातार बढ़ोतरी'
ऊना से भाजपा विधायक सतपाल सिंह सती ने भी कांग्रेस सरकार पर एंट्री टैक्स बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले यह टैक्स 40 रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 170 रुपये तक कर दिया गया है। इससे हिमाचल और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार और आवाजाही करने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस के जिला अध्यक्ष देशराज गौतम ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नोटिफिकेशन के जरिए टैक्स को स्पष्ट किया है और लोगों को राहत भी दी गई है। उनके मुताबिक भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है।
दोनों राज्यों के लोगों पर असर
एंट्री टैक्स का सीधा असर हिमाचल और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों पर पड़ रहा है। यहां के लोग रोजमर्रा के काम और व्यापार के लिए एक-दूसरे राज्यों में आते-जाते हैं, जिससे टैक्स बढ़ने पर उनकी जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। भाजपा नेताओं ने सुझाव दिया है कि दोनों राज्यों की सरकारें मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालें। उनका कहना है कि टैक्स को कम किया जाए या कोई अन्य विकल्प खोजा जाए, ताकि जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
एंट्री टैक्स को लेकर बढ़ता विवाद अब सड़क से राजनीति तक पहुंच गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई ठोस समाधान नहीं निकलता।












