मनरेगा में काम न मिलने से भड़का श्रमिकों का गुस्सा, 18 अप्रैल को बीडीओ कार्यालय का होगा घेराव
नूतन ठाकुर, अनंत ज्ञान, बालीचौकी: मनरेगा के तहत रोजगार न मिलने से नाराज श्रमिकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। ग्राम पंचायत थाटा के झुखड़ी में मनरेगा श्रमिक संगठन और हिमाचल किसान सभा की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र और प्रदेश सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए गए।
बैठक में बड़ी संख्या में जुटे श्रमिकों ने अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि उन्होंने 10 फरवरी 2026 को मनरेगा के तहत काम के लिए विधिवत आवेदन किया था, लेकिन दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्हें कोई काम उपलब्ध नहीं कराया गया। श्रमिकों ने कहा कि मनरेगा कानून के अनुसार 15 दिनों के भीतर काम देना अनिवार्य है, और यदि ऐसा नहीं होता तो संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए।
लेकिन हकीकत इसके उलट है...60 दिन गुजर जाने के बाद भी न तो रोजगार मिला और न ही कोई भत्ता दिया गया। इससे श्रमिकों में भारी रोष और निराशा का माहौल है।
बैठक में वक्ताओं ने प्रशासनिक लापरवाही पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि संबंधित अधिकारी जानबूझकर कानून की अनदेखी कर रहे हैं और श्रमिकों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। आरोप लगाया गया कि मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण रोजगार योजना को जमीनी स्तर पर कमजोर किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
इस दौरान सर्वसम्मति से बड़ा निर्णय लेते हुए संगठनों ने 18 अप्रैल को विकासखंड अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय बालीचौकी का 24 घंटे का घेराव करने का ऐलान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
मनरेगा श्रमिक संगठन के अध्यक्ष इंदर सिंह ने बताया कि यह आंदोलन श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई है और जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें:
- मनरेगा के तहत तुरंत रोजगार उपलब्ध कराया जाए
- लंबित बेरोजगारी भत्ता जल्द जारी किया जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो
- मनरेगा को कमजोर करने की कथित कोशिशों पर रोक लगे
बैठक ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर हालात नहीं बदले, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।












