हिमाचल सरकार का बड़ा एक्शन, बैंक खातों में पड़े 1170 करोड़ वापस कोषागार में जमा
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों के बैंक खातों में बिना उपयोग पड़ी राशि को वापस सरकारी कोषागार में जमा करवाने की सख्त प्रक्रिया शुरू कर दी है। वित्त सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने सभी विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन विभागों के एक से अधिक बैंक खाते हैं और जिनमें लंबे समय से राशि निष्क्रिय पड़ी है, वे तीन दिन के भीतर यह राशि कोषागार में जमा करवाएं।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद अब तक करीब 1170 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न विभागों से वापस सरकारी खाते में जमा करवाई जा चुकी है। बताया जा रहा है कि कई मामलों में यह पैसा वर्षों और कुछ मामलों में दशकों से बैंक खातों में बिना उपयोग पड़ा हुआ था। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे थे।
सरकार को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कई विभाग योजनाओं और परियोजनाओं के नाम पर अलग-अलग बैंक खाते खोलते हैं, लेकिन योजनाएं समाप्त होने के बाद भी खाते सक्रिय रहते हैं और उनमें पड़ी राशि वर्षों तक उपयोग में नहीं लाई जाती। इससे सरकारी धन फंस जाता है और वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता है।
वित्त विभाग ने इस अभियान को तेज करने के लिए प्रदेश के 32 बैंकों से भी सहयोग मांगा है। बैंकों के माध्यम से ऐसे खातों की पहचान कर निष्क्रिय राशि को ट्रैक किया गया, जिसके बाद संबंधित विभागों को तुरंत राशि वापस जमा करने के निर्देश दिए गए।
सरकार इससे पहले भी अनस्पेंट फंड्स को मुख्य कोषागार में समाहित करने के निर्देश दे चुकी है, लेकिन इस बार कार्रवाई ज्यादा सख्त और समयबद्ध मानी जा रही है। तीन दिन की स्पष्ट समय सीमा तय कर विभागों को चेतावनी दी गई है कि लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वर्षों से रुकी हुई राशि को विकास कार्यों और जनहित योजनाओं में उपयोग करने का रास्ता भी साफ होगा। वित्त विभाग अब ऐसे खातों की नियमित मॉनिटरिंग करेगा और भविष्य में एक ही विभाग द्वारा कई बैंक खाते खोलने पर भी नियंत्रण की तैयारी की जा रही है, ताकि सरकारी धन का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।






