GI टैग से चमकी चंबा थाल की पहचान, देश-विदेश में बढ़ी डिमांड
चंबा: हिमाचल प्रदेश का चंबा जिला अपनी समृद्ध संस्कृति, विरासत और अद्भुत हस्तकला के लिए देशभर में जाना जाता है। इन्हीं पारंपरिक कलाओं में पीतल की चंबा थाल पर की जाने वाली नक्काशी (मूर्तिकला) एक अनूठी कला है, जिसने दशकों से देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब इस ऐतिहासिक हस्तकला को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता और बाजार दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
राजाओं के दौर से चली आ रही है चंबा थाल की परंपरा
चंबा थाल का इतिहास रियासतकाल से जुड़ा हुआ है। उस समय पीतल की थालों पर राजाओं-महाराजाओं, देवी-देवताओं और प्रसिद्ध चंबा रूमाल की कलाकृतियों को उकेरा जाता था। समय के साथ इस कला ने आधुनिक रूप धारण किया और अब कलाकार इन थालों पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, खिलाड़ियों, फिल्मी हस्तियों से लेकर आम लोगों तक के हू-ब-हू चित्र उकेर रहे हैं।
छैनी और हथौड़े की मदद से पीतल की थाल पर बनाई जाने वाली यह महीन नक्काशी पूरी तरह हस्तनिर्मित होती है, जो चंबा की पहचान बन चुकी है।
GI टैग मिलने के बाद बढ़ी मांग
चंबा थाल को GI टैग मिलने के बाद शिल्पकारों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। कलाकारों का कहना है कि टैग मिलने के बाद देश के विभिन्न राज्यों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और मांग इतनी बढ़ गई है कि उन्हें आराम करने तक का समय नहीं मिल रहा।
GI टैग मिलने से इस कला को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी। साथ ही नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और असली चंबा थाल को उचित बाजार व बेहतर कीमत मिलेगी।
एक हजार से लेकर एक लाख रुपये तक बिकती है चंबा थाल
चंबा थाल की कीमत उस पर की गई नक्काशी और आकार पर निर्भर करती है।
- छोटे थाल एक दिन में तैयार हो जाते हैं।
- बड़े और जटिल डिज़ाइन वाले थाल बनाने में 10 से 15 दिन, जबकि कुछ विशेष थाल तैयार करने में एक महीने तक का समय लग जाता है।
- बाजार में चंबा थाल की कीमत 1,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये और विशेष ऑर्डर पर एक लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच जाती है।
देवी-देवताओं की आकृतियों वाली थालों की सबसे अधिक मांग रहती है।
प्रधानमंत्री मोदी और सचिन तेंदुलकर तक पहुंची चंबा थाल
चंबा के प्रसिद्ध शिल्पकार गौरव आनंद बताते हैं कि चंबा थाल की परंपरा सदियों पुरानी है और आज यह सम्मान के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल की जाती है। बड़े आयोजनों में मुख्य अतिथियों और विशिष्ट मेहमानों को स्मृति चिन्ह के रूप में चंबा थाल भेंट करने की परंपरा तेजी से बढ़ी है।
उन्होंने बताया कि उनके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर, कई मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधायक और फिल्मी हस्तियों के चित्रों वाली चंबा थाल तैयार करने के ऑर्डर आ चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और सचिन तेंदुलकर को उनकी तस्वीर उकेरी हुई विशेष चंबा थाल भेंट भी की जा चुकी है।
फ्रांस तक पहुंची चंबा की कला
चंबा थाल की पहचान केवल भारत तक सीमित नहीं है। वर्ष 2022 में फ्रांस में आयोजित 75वें कान्स फिल्म फेस्टिवल के दौरान तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने फ्रांस के सेंट ट्रोपेज़ की मेयर सिल्वी सिरी को स्मृति चिन्ह के रूप में चंबा थाल भेंट की थी। इसके साथ उन्होंने पारंपरिक हिमाचली टोपी और शॉल भी भेंट की थी। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चंबा थाल की पहचान को नई ऊंचाई दी।
युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर
शिल्पकार हर्षित मल्होत्रा का कहना है कि यदि युवा इस कला को सीख लें तो बेरोजगार रहने की नौबत नहीं आएगी। हिमाचल ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और आने वाले वर्षों में इस कला का कारोबार और तेजी से बढ़ेगा।
सुरक्षित और टिकाऊ होने के कारण बढ़ रही लोकप्रियता
शिल्पकार सुरेश कुमार बताते हैं कि पीतल से बनी चंबा थाल मजबूत और टिकाऊ होती है। इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है। यात्रा के दौरान इसके टूटने या खराब होने का खतरा बेहद कम रहता है, इसलिए लोग इसे उपहार और स्मृति चिन्ह के रूप में विशेष पसंद करते हैं।
प्रशासन ने भी जताई खुशी
चंबा के उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने GI टैग मिलने पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे चंबा थाल और यहां की मूर्तिकला को वैश्विक पहचान मिलेगी। कलाकारों को उनके हुनर का उचित मूल्य मिलेगा, इस कला का संरक्षण होगा और स्थानीय शिल्पकारों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
चंबा की सांस्कृतिक धरोहर को मिला नया सम्मान
GI टैग मिलने के साथ ही चंबा थाल केवल एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक प्रतीक बनकर उभरी है। यदि इस कला को सरकार, बाजार और नई पीढ़ी का निरंतर सहयोग मिलता रहा, तो आने वाले समय में चंबा थाल दुनिया के प्रमुख पारंपरिक हस्तशिल्पों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकती है।






