हिमाचल में माइनिंग विभाग में बड़ा सुधार: अब निदेशालय से होंगे तबादले, सरकार ने जारी की नई व्यवस्था
शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने खनन (माइनिंग) विभाग में पारदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने माइनिंग अफसरों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। उद्योग विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब माइनिंग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट माइनिंग इंस्पेक्टर और माइनिंग गार्ड के तबादले केवल निदेशालय स्तर से ही किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का एक माइनिंग कार्यालय से दूसरे माइनिंग कार्यालय, जियोलॉजिकल विंग या जियोलॉजिकल विंग से माइनिंग कार्यालय में स्थानांतरण केवल स्वीकृत रिक्त पदों (Sanctioned Vacancies) के आधार पर ही संभव होगा। इससे तबादला प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
फील्ड ड्यूटी को नहीं माना जाएगा तबादला
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि स्थानांतरण नीति के तहत किसी अधिकारी के सामान्य कार्यकाल (टेन्योर) की गणना उसकी नियमित तैनाती वाले मूल कार्यालय से ही होगी। यदि किसी अधिकारी को उसी माइनिंग कार्यालय के अधिकार क्षेत्र में किसी अन्य क्षेत्र में निरीक्षण, अवैध खनन पर निगरानी या अन्य फील्ड ड्यूटी के लिए भेजा जाता है, तो इसे स्थानांतरण नहीं माना जाएगा। इससे अधिकारी के कार्यकाल पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अवैध खनन पर निगरानी होगी मजबूत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध खनन की रोकथाम, निरीक्षण और अन्य परिचालन आवश्यकताओं के लिए एक ही माइनिंग कार्यालय के भीतर अधिकारियों की क्षेत्रवार तैनाती केवल आंतरिक फील्ड डिप्लॉयमेंट मानी जाएगी। इसे न तो नई पोस्टिंग माना जाएगा और न ही स्थानांतरण की श्रेणी में रखा जाएगा।
क्या है सरकार का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य तबादला प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और जवाबदेह बनाना है। इसके साथ ही प्रशासनिक जटिलताओं को कम करने और तबादलों से जुड़े संभावित कानूनी विवादों से बचने में भी मदद मिलेगी। यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है और सभी संबंधित अधिकारियों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।






