नालागढ़ में 350 करोड़ से बनेगा मेडिकल डिवाइस पार्क, 11 नामी कंपनियां करेंगी निवेश
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नालागढ़ में प्रस्तावित मेडिकल डिवाइस पार्क को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार अब केंद्र के सहयोग के बिना अपने स्तर पर 265 एकड़ भूमि पर करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से इस पार्क का विकास करेगी। परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जाएगी, जो सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत निवेशकों को भूमि चयन और उद्योग स्थापित करने की त्वरित मंजूरी प्रदान करेगी।
प्रदेश सरकार ने जुलाई 2024 में केंद्र से प्राप्त 30 करोड़ रुपये लौटाने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना है कि केंद्र की शर्तों के अनुसार उद्योगों को अत्यधिक रियायतें देने से राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता। इसलिए सरकार ने अपने संसाधनों से परियोजना विकसित करने का फैसला लिया है।
राज्य सरकार के अनुसार, मेडिकल डिवाइस पार्क शुरू होने के बाद करीब 20 हजार करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर होने की संभावना है और अगले पांच से सात वर्षों में प्रदेश को लगभग 500 करोड़ रुपये का लाभ मिल सकता है।
अब तक 11 नामी कंपनियां नालागढ़ में निवेश के प्रस्ताव दे चुकी हैं। निवेशकों को अपनी पसंद के स्थान पर इकाइयां स्थापित करने की सुविधा मिलेगी, जबकि बिजली, पानी, सड़क और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी तेजी से विकास किया जाएगा।
मेडिकल डिवाइस पार्क का निर्माण क्लस्टर विकास योजना के तहत किया जाएगा और इसके लिए सरकार सिडबी से ऋण लेगी। संशोधित योजना के अनुसार पार्क की 25 प्रतिशत भूमि चिकित्सा उपकरण उद्योगों और 75 प्रतिशत भूमि अन्य उद्योगों के लिए आरक्षित रहेगी।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि निवेशकों को भूमि आवंटन और अन्य औपचारिकताओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि हिमाचल सरकार अपने संसाधनों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफलतापूर्वक विकसित करने में सक्षम है।






