UN में बदलेगा ग्लोबल टैक्स सिस्टम, भारत को मिल सकता है विदेशी कंपनियों पर कर लगाने का अधिकार
न्यूयॉर्क। दुनिया भर में टैक्स वसूली की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 3 से 13 अगस्त 2026 तक पांचवें सत्र की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। इसमें सदस्य देश नए ‘यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टैक्स कोऑपरेशन’ को अंतिम रूप देने पर चर्चा कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ऐसी वैश्विक कर व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें भारत जैसे विकासशील देशों के आर्थिक हितों की बेहतर सुरक्षा हो सके।
इस बार पहली बार देश केवल सिद्धांतों पर चर्चा करने के बजाय तीन प्रमुख कर समझौतों के कानूनी मसौदों पर सीधे विचार कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) की देखरेख में चल रही प्रक्रिया में सीमा पार सेवाओं और कर विवादों के समाधान से जुड़े प्रोटोकॉल भी शामिल हैं। लक्ष्य है कि 2027 तक अंतिम मसौदा संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष मंजूरी के लिए पेश किया जाए।
भारत के लिए बड़ा अवसर
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था उस दौर में बनी थी, जब कारोबार के लिए किसी देश में भौतिक मौजूदगी जरूरी होती थी। डिजिटल युग में बहुराष्ट्रीय कंपनियां बिना स्थानीय कार्यालय के भी भारतीय बाजार से बड़ी कमाई कर रही हैं।
नई व्यवस्था लागू होने पर भारत को अपने बाजार से कमाई करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों पर कर लगाने के अधिक अधिकार मिल सकते हैं। इससे टैक्स हेवन के जरिए मुनाफा दूसरे देशों में स्थानांतरित करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लग सकती है। हालांकि, दोहरे कराधान और अंतरराष्ट्रीय कर विवादों से बचना बड़ी चुनौती होगी।
कर चोरी पर लगेगी लगाम
विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां ट्रांसफर प्राइसिंग, रॉयल्टी, परामर्श शुल्क और इंट्रा-ग्रुप लोन जैसे माध्यमों से मुनाफे को कम टैक्स वाले देशों में स्थानांतरित करती हैं। भारत समेत विकासशील देश वित्तीय सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान की मांग कर रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत देशों के बीच डिजिटल वित्तीय जानकारी साझा होने से लेनदेन का मजबूत रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे कर चोरी और वित्तीय हेरफेर पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।






