आस्था का अद्भुत केंद्र है कांगड़ा का शिब्बोथान धाम, सर्पदंश पीड़ितों को लेकर दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग
धर्मशाला। कांगड़ा जिले के ज्वाली उपमंडल के भरमाड़ गांव में स्थित शिब्बोथान धाम वर्षों से श्रद्धा, आस्था और लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस प्राचीन धार्मिक स्थल पर दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान शिव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
स्थानीय लोक मान्यताओं के अनुसार शिब्बोथान धाम एक प्राचीन सिद्धपीठ है। कहा जाता है कि इस पवित्र स्थल पर ऋषि-मुनियों और साधु-संतों ने लंबे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण यह स्थान विशेष आध्यात्मिक शक्ति और धार्मिक महत्व वाला माना जाता है। मंदिर परिसर का शांत वातावरण, चारों ओर फैली हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
सर्पदंश से जुड़ी है खास लोकमान्यता
शिब्बोथान धाम की सबसे चर्चित लोकमान्यताओं में से एक सर्पदंश से जुड़ी है। आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से ऐसी मान्यता रही है कि सर्पदंश से पीड़ित लोगों को मंदिर में लाकर यहां की धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करवाई जाती है। इसी लोकविश्वास के चलते आज भी कई लोग सर्पदंश की घटना के बाद पीड़ित को लेकर शिब्बोथान धाम पहुंचते हैं।
हालांकि, सर्पदंश की स्थिति में धार्मिक आस्था के साथ-साथ तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेना बेहद जरूरी है। किसी भी व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है।
सावन और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है सैलाब
सावन मास, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक पर्वों के दौरान शिब्बोथान धाम में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। जुलाई और अगस्त में यहां आयोजित होने वाले मेलों में कांगड़ा के अलावा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
मेलों के दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के साथ स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक भी देखने को मिलती है। श्रद्धालुओं के पहुंचने से पूरा क्षेत्र शिवभक्ति के रंग में रंग जाता है।
आस्था के साथ संस्कृति की भी पहचान
शिब्बोथान धाम आज केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि कांगड़ा की समृद्ध लोक आस्था, संस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक बन चुका है। पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं ने इस धाम को स्थानीय लोगों के जीवन से गहराई से जोड़ रखा है।
प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व के कारण यह स्थल आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी खास पहचान रखता है। श्रद्धालुओं का विश्वास और यहां की लोक परंपराएं शिब्बोथान धाम को कांगड़ा की धार्मिक विरासत में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।






