सोशल मीडिया पोस्ट से मचा बवाल, जनजातीय समुदाय पर कथित टिप्पणी के बाद कुल्लू की युवती पर FIR
कुल्लू/केलांग। कुल्लू अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद अब सोशल मीडिया तक पहुंचकर कानूनी रूप ले चुका है। जनजातीय समुदाय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद लाहौल-स्पीति पुलिस ने कुल्लू की रहने वाली यशिका ठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है और जनजातीय समुदाय में इसे लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
प्रसूता की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, 21 जून को कुल्लू अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते हुए चिकित्सीय लापरवाही के आरोप लगाए। मामले की जांच के बाद लाहौल-स्पीति की रहने वाली एक महिला डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) भी लाहौल-स्पीति से संबंध रखते हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया।

सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज हुई FIR
आरोप है कि कुल्लू की रहने वाली यशिका ठाकुर ने सोशल मीडिया पर जनजातीय समुदाय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की। टिप्पणी के स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद लाहौल-स्पीति के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर उदयपुर थाना में यशिका ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब वायरल पोस्ट, स्क्रीनशॉट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
वीडियो जारी कर मांगी सार्वजनिक माफी
विवाद बढ़ने और सोशल मीडिया पर लगातार विरोध के बाद यशिका ठाकुर ने एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत की घटना से वह बेहद दुखी और भावनात्मक रूप से आहत थीं, जिसके कारण उनसे ऐसी टिप्पणी हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। साथ ही उन्होंने अपना विवादित फेसबुक कमेंट भी हटा दिया है।
विधायक अनुराधा राणा ने दी प्रतिक्रिया
लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकार की टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों को मिले संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के पीछे एक लंबा ऐतिहासिक और सामाजिक संघर्ष रहा है, जिसे समझना जरूरी है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा से बचने की अपील की।
पुलिस कर रही मामले की जांच
लाहौल-स्पीति पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायत, सोशल मीडिया पोस्ट और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। चूंकि मामला जनजातीय समुदाय की भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा है, इसलिए प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।






