अब ड्राइवर को झपकी लेते ही जगा देगा ‘सेफ डैश’, IIT मंडी के शोधार्थियों ने विकसित की अनोखी तकनीक
मंडी। सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजहों में ड्राइवर की थकान और झपकी लगना शामिल है। अक्सर बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों के हादसों में यह कारण सामने आता है। ऐसे हादसों को रोकने के लिए आईआईटी मंडी के शोधार्थियों ने एक अत्याधुनिक और किफायती तकनीक विकसित की है, जो ड्राइवर के नींद की अवस्था में पहुंचते ही उसे तुरंत सतर्क कर देती है।
शोधार्थियों की टीम ने ‘सेफ डैश’ (SafeDash) नामक रियल-टाइम ड्राइवर ड्रोसिनेस डिटेक्शन सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम ड्राइवर के चेहरे, आंखों और सिर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखता है और थकान या झपकी के संकेत मिलते ही चेतावनी जारी करता है।

AI और एज कंप्यूटिंग का शानदार मेल
आमतौर पर ऐसी उन्नत तकनीकें केवल महंगी लग्जरी कारों में देखने को मिलती हैं, लेकिन आईआईटी मंडी के छात्रों ने इसे साधारण बसों और ट्रकों के लिए भी सुलभ बना दिया है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एज कंप्यूटिंग तकनीक पर आधारित है, जो बिना इंटरनेट के भी पूरी क्षमता के साथ काम कर सकता है।
ऐसे करता है काम
वाहन के डैशबोर्ड पर लगाए जाने वाले इस सिस्टम में एक स्टैंडर्ड वेबकैम ड्राइवर के चेहरे को लगातार स्कैन करता है। वहीं एनवीडिया जेटसन नैनो प्रोसेसर कैमरे से प्राप्त डेटा को रियल टाइम में प्रोसेस करता है। मीडिया पाइप तकनीक की मदद से यह ड्राइवर के चेहरे के 468 महत्वपूर्ण बिंदुओं को ट्रैक करता है, जिससे आंखों की गतिविधि, सिर के झुकाव और ध्यान की स्थिति का सटीक विश्लेषण संभव हो पाता है।
तीन स्तर पर देता है चेतावनी
- ‘सेफ डैश’ की सबसे बड़ी विशेषता इसका थ्री-स्टेज अलर्ट सिस्टम है।
- सबसे पहले डैशबोर्ड स्क्रीन पर लाल चेतावनी संदेश दिखाई देता है।
- यदि स्थिति बनी रहती है तो सिस्टम तेज आवाज में “Wake Up” जैसी चेतावनी देता है। इसके बाद स्टीयरिंग व्हील में लगे वाइब्रेशन मोटर सक्रिय होकर कंपन पैदा करते हैं, जिससे गहरी तंद्रा में मौजूद ड्राइवर भी तुरंत सतर्क हो जाता है।
मैनेजमेंट भी रख सकेगा नजर
यह तकनीक केवल ड्राइवर तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट कंपनियों और वाहन मालिकों के लिए भी इसमें विशेष सुविधा दी गई है। मैनेजमेंट किसी भी समय ड्राइवर की थकान और अलर्ट का रिकॉर्ड देख सकता है। यदि कोई चालक बार-बार लापरवाही करता है तो सिस्टम स्वतः ईमेल अलर्ट भेज देता है। डेटा को ग्राफ और चार्ट के रूप में प्रदर्शित करने के लिए रेडिस तकनीक का उपयोग किया गया है।
पेटेंट की प्रक्रिया जारी
इस परियोजना पर काम कर रहे शोधार्थी नवदीप सिंह, श्रियांश गुप्ता, वंश गोयल, तनिष्क गुप्ता, रोहन अग्रवाल, नवेद्या गोयल, ओजस मोरे और हिमांशी ने बताया कि सिस्टम को मजबूत ब्लैक एक्रिलिक केस में सुरक्षित किया गया है, ताकि पहाड़ी और कठिन रास्तों पर भी यह सुचारू रूप से काम कर सके।
शोधार्थियों के अनुसार अब इस तकनीक को इंफ्रारेड (IR) कैमरों से लैस करने की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे रात के अंधेरे में भी इसकी सटीकता बनी रहे। टीम ने इस नवाचार के पेटेंट के लिए आवेदन भी कर दिया है।






