IFS कैडर कटौती प्रस्ताव पर केंद्र सख्त, हिमाचल सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) कैडर में कटौती के प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार ने अतिरिक्त जानकारी तलब की है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर कैडर संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।
केंद्र ने राज्य सरकार से पूछा है कि करीब चार दशक पहले हिमाचल प्रदेश में आईएफएस अधिकारियों की स्वीकृत कैडर स्ट्रेंथ कितनी थी और समय-समय पर इसमें कितनी बढ़ोतरी की गई। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने के समय राज्य सरकार ने कौन-कौन से तर्क और आवश्यकताएं प्रस्तुत की थीं।
केंद्र ने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि यदि वर्तमान में आईएफएस कैडर में कटौती की जाती है तो भविष्य में वन प्रबंधन, प्रशासनिक आवश्यकताओं और अधिकारियों की कमी से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाएगा। साथ ही कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार की क्या रणनीति होगी। राज्य सरकार ने भेजा जवाब सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा मांगी गई जानकारी का जवाब तैयार कर भेज दिया है।
अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हिमाचल में IFS अधिकारियों की वर्तमान स्थिति हिमाचल प्रदेश में वर्तमान समय में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) की स्वीकृत कैडर स्ट्रेंथ 114 पदों की है। हालांकि इनमें से केवल 87 पद ही भरे हुए हैं। इनमें भी 15 अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं, जबकि चार अधिकारी अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल वन सेवा (एचएफएस) अधिकारियों को पदोन्नत कर आईएफएस में शामिल किए जाने की प्रक्रिया भी धीमी रही है, जिसके कारण कई पद रिक्त बने हुए हैं। राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष आईएफएस कैडर को 114 से घटाकर 83 पद करने का प्रस्ताव रखा है। यानी सरकार कुल 31 पद कम करना चाहती है।
माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य मौजूदा रिक्तियों, प्रशासनिक जरूरतों और कार्यप्रणाली के पुनर्गठन को ध्यान में रखते हुए कैडर का पुनर्संतुलन करना है। अब इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर लिया जाएगा, जिसके बाद ही हिमाचल में आईएफएस कैडर की नई संरचना तय हो सकेगी।






