कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार: मांझी खड्ड पर बनेगा देश का दूसरा रनवे ब्रिज, पुणे के विशेषज्ञों ने फाइनल किया प्रोजेक्ट
हिमाचल प्रदेश के बहुप्रतीक्षित कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। एयरपोर्ट विस्तार के तहत मांझी खड्ड पर बनने वाले अत्याधुनिक रनवे ब्रिज के निर्माण को लेकर एयरपोर्ट परिसर में एक उच्चस्तरीय तकनीकी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पुणे स्थित केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (CWPRS) के वरिष्ठ विशेषज्ञ अरुण कुमार तथा वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (WAPCOS) की विशेषज्ञ टीम ने भाग लिया।
बैठक के दौरान प्रस्तावित रनवे ब्रिज के तकनीकी डिजाइन, संरचनात्मक मजबूती, सुरक्षा मानकों और मांझी खड्ड में पानी के प्राकृतिक बहाव को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे इंजीनियरिंग मॉडल पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि पुल का निर्माण अंतरराष्ट्रीय विमानन मानकों के अनुरूप किया जाएगा, ताकि भविष्य में बड़े विमानों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हो सके।
380 मीटर लंबे रनवे ब्रिज पर उतरेंगे एयरबस और बोइंग
प्रस्तावित रनवे ब्रिज करीब 380 मीटर लंबा और 360 मीटर चौड़ा होगा। इसके निर्माण के बाद एयरबस A-320 और बोइंग 737 जैसे बड़े जेट विमान भी कांगड़ा एयरपोर्ट पर सुरक्षित रूप से लैंडिंग और टेकऑफ कर सकेंगे। यह परियोजना मौजूदा एयरपोर्ट की क्षमता को कई गुना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
बैठक के बाद विशेषज्ञों ने मौके पर पहुंचकर प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया और पुल के निर्माण से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं भौगोलिक पहलुओं का आकलन किया। एयरपोर्ट के सहायक प्रबंधक शैलेश कुमार ने बताया कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर पुल के डिजाइन को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया तेज की जाएगी।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना को हिमाचल प्रदेश के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है। यह रनवे ब्रिज बनने के बाद देश का दूसरा रनवे ब्रिज होगा। परियोजना पूरी होने से बड़े विमानों की नियमित आवाजाही संभव होगी, जिससे धर्मशाला, मैक्लोडगंज, कांगड़ा सहित पूरे प्रदेश में पर्यटन को नई गति मिलेगी। साथ ही व्यापार, निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों का मानना है कि एयरपोर्ट विस्तार का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट हिमाचल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क के लिहाज से नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।






