BBMB बकाया विवाद में हिमाचल को बड़ी उम्मीद, 20 अगस्त को होगी अहम सुनवाई
हिमाचल प्रदेश के लिए लंबे समय से चले आ रहे भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) के बकाया भुगतान विवाद में अब समाधान की उम्मीद बढ़ गई है। करीब छह दशक पुराने इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि पंजाब सरकार केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार करने के काफी करीब पहुंच गई है। ऐसे में 20 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई हिमाचल के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अगर पंजाब केंद्र के प्रस्ताव पर अंतिम सहमति जता देता है, तो वर्षों से लंबित इस विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो सकता है। हिमाचल में इसे राज्य के लंबे कानूनी संघर्ष की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई हुई। हिमाचल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पंजाब की सहमति को लेकर सवाल किया। इस पर केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि स्थिति पहले से काफी बेहतर है और पंजाब प्रस्ताव पर सहमति के करीब पहुंच रहा है।
केंद्र ने कुछ छोटी अड़चनों को दूर करने की बात कही। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को आगे बढ़ाने के लिए 20 अगस्त 2026 की तारीख तय कर दी।
नकद भुगतान के बजाय बिजली से हो सकता है निपटारा
विवाद के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने कैशलेस फॉर्मूला सुझाया है। इसके तहत पुराने बकाये का निपटारा सीधे नकद भुगतान के बजाय बिजली या ऊर्जा के माध्यम से किया जा सकता है। हिमाचल और हरियाणा इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमत बताए गए हैं, जबकि पंजाब ने बिजली की गणना और भुगतान दर को लेकर आपत्तियां जताई थीं।
अब पंजाब के रुख में नरमी के संकेत मिलने से उम्मीद जगी है कि दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंच सकते हैं।
1996 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था मामला
BBMB में अपने अधिकार और हिस्सेदारी को लेकर हिमाचल प्रदेश ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने BBMB परियोजनाओं में हिमाचल की हिस्सेदारी 7.19 प्रतिशत निर्धारित की थी।
हालांकि, बकाया भुगतान और उसके निपटारे को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। अब केंद्र के नए प्रस्ताव और पंजाब के बदलते रुख से करीब तीन दशक से चले आ रहे इस कानूनी विवाद के समाधान की उम्मीद फिर मजबूत हुई है।
अब सभी की नजरें 20 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।






