किन्नौर में फिर दरका पहाड़, याशंग गांव में मचा हड़कंप; ग्रामीणों ने जलविद्युत परियोजना की ब्लास्टिंग को बताया वजह
किन्नौर: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में लगातार पहाड़ दरकने की घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। बुधवार सुबह चगांव पंचायत के अंतर्गत याशंग गांव में स्थित लौदांग पहाड़ का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। विशाल चट्टानों के गिरने से तेज धमाकों और कंपन ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। आवाज सुनते ही घबराए ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
घटना में स्थानीय निवासी विजय पाल के खेतों और पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, गांव को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है, जिससे लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे ग्रामीणों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने जलविद्युत परियोजना की टनल को ठहराया जिम्मेदार
घटना के बाद ग्रामीणों ने करछम-वांगतू जलविद्युत परियोजना के निर्माण के दौरान की गई भारी ब्लास्टिंग पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि टनल निर्माण के समय किए गए विस्फोटों के दुष्प्रभाव अब धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना बनने के बाद क्षेत्र के कई प्राकृतिक जलस्रोत सूख गए, जमीन में दरारें पड़ गईं और कई मकानों को भी नुकसान पहुंचा। साथ ही स्थानीय पर्यावरण और भू-संतुलन पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ा है।
17-18 साल बाद भी नहीं मिला रॉयल्टी का लाभ
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हुए करीब 17 से 18 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों को आज तक एक प्रतिशत स्थानीय क्षेत्र विकास (रॉयल्टी) का लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि इस संबंध में शासन और प्रशासन प्रभावित लोगों को उनका अधिकार दिलाने में पूरी तरह विफल रहा है।
टनल से लगातार हो रहा पानी का रिसाव, बड़े हादसे की आशंका
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि जलविद्युत परियोजना की टनल से पिछले कई वर्षों से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक जांच और आवश्यक सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
वैज्ञानिक सर्वे और मुआवजे की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्र का वैज्ञानिक एवं भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने, नुकसान का उचित आकलन कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने तथा क्षेत्र की सुरक्षा के लिए स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ दरकने की लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए सरकार और प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े नुकसान से बचा जा सके।






