हिमाचल के इस गांव में शादी में अब नहीं आ सकेंगे 100 से ज्यादा बाराती, शराब-दहेज पर भी लगा बैन
शिलाई। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल के धारवा गांव की ग्राम सभा ने सामाजिक आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाने के लिए एक सराहनीय फैसला लिया है। छह जुलाई को आयोजित ग्राम सभा बैठक में गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीणों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से कई नए सामाजिक नियम लागू किए गए।
ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार अब शादी-विवाह में सभी प्रकार के नशे, बीयर और शराब पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। साथ ही दहेज लेने और देने पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है, ताकि समाज में समानता और सादगी को बढ़ावा मिल सके।
आभूषण और दिखावे पर भी सीमा
सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों और शादी में बढ़ते दिखावे को देखते हुए महिलाओं के आभूषणों को भी सीमित किया गया है। अब विवाह समारोह में केवल नाक की तिल्ली, कान के झुमके और गले का मंगलसूत्र पहनने की अनुमति होगी।
बारात और मेहमानों की संख्या तय
ग्राम सभा ने बारात में अधिकतम 15 वाहन और 100 बाराती शामिल करने की सीमा तय की है। मामा स्वागत को भी सीमित करते हुए केवल शाकाहारी भोजन और परिवार के चुनिंदा सदस्यों की भागीदारी तय की गई है।
फास्ट फूड और अन्य आयोजनों पर नियम
विवाह समारोह में फास्ट फूड पर प्रतिबंध लगाया गया है। लकड़ी की दलाई में दूल्हे पक्ष को भोजन, पटलोज में केवल पांच लोगों की भागीदारी और बच्चे के जन्म पर सोईताटू में पांच या सात लोगों की उपस्थिति जैसे नियम भी लागू किए गए हैं।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
ग्राम सभा ने नियमों के उल्लंघन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा दोषी परिवार को पूरी पंचायत को बकरे का भोज देना होगा और गांव का कोई भी व्यक्ति ऐसे परिवार के विवाह समारोह में शामिल नहीं होगा।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा, दिखावे और अनावश्यक खर्च को रोककर सादगी, समानता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है।






