सोशल मीडिया पर सरकार विरोधी दुष्प्रचार पर लगेगी लगाम, 15 दिन में बनेगा नया कानून
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंटरनेट मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य सरकार और मंत्रियों के खिलाफ कथित दुष्प्रचार फैलाने के मामलों पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। इस संबंध में मंगलवार को शिमला में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उपसमिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों और गतिविधियों को लेकर फैलाए जा रहे कथित भ्रामक और गलत प्रचार पर विस्तार से चर्चा की गई।
एजेंडे के तहत सरकार की छवि खराब करने का आरोप
सरकार का मानना है कि कुछ लोग इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि कई डिजिटल और सोशल मीडिया मंच ऐसे हैं, जिनका न तो कोई पंजीकरण है और न ही उन पर किसी प्रकार का प्रभावी नियंत्रण है। ऐसे मंचों पर सरकार की नीतियों और गतिविधियों को लेकर भ्रामक और गलत जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।
कानूनी दायरे में लाने की तैयारी
बैठक में इस बात पर भी मंथन किया गया कि इंटरनेट मीडिया के माध्यम से फैलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार को किस प्रकार कानून के दायरे में लाया जाए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस विषय पर एक विस्तृत खाका तैयार किया जाए, ताकि भ्रामक और दुष्प्रचार सामग्री पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर इस संबंध में नियमों और व्यवस्थाओं का प्रारूप तैयार किया जाएगा।
कैबिनेट के सामने रखी जाएगी रिपोर्ट
मंत्रिमंडलीय उपसमिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत करेगी, जिसके बाद इस विषय पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रिंट मीडिया और उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म निर्धारित कानूनी दायित्वों का पालन कर रहे हैं, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर कुछ एजेंडा आधारित गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान करती है, लेकिन भ्रामक और दुष्प्रचार सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कानूनी व्यवस्था आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कमेटी सभी पहलुओं का गहन अध्ययन कर रही है।






