CM सुक्खू का बड़ा दावा: 'हिमाचल न मानता तो आधी दिल्ली सूख जाती, 'मेरे रहते हिमाचल के हितों से समझौता नहीं'
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बार फिर राज्य के अधिकारों की लड़ाई को लेकर केंद्र सरकार पर परोक्ष निशाना साधा है। HPU के स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने किशाऊ बांध परियोजना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में साफ शब्दों में कह दिया था कि यदि समझौता हिमाचल के हित में नहीं होगा तो उनके मुख्यमंत्री रहते यह समझौता कभी नहीं होगा।
'हिमाचल नहीं मानता तो आधी दिल्ली सूख जाती'
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से यमुना का पानी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को मिलना है। उन्होंने कहा कि यदि हिमाचल प्रदेश इस परियोजना पर सहमत नहीं होता तो आधी दिल्ली सूख जाती और पूरा गुरुग्राम पानी के संकट से जूझता। उन्होंने प्रदेश की नदियों को हिमाचल का सबसे बड़ा प्राकृतिक संसाधन बताते हुए कहा कि यह राज्य के लिए 'बहता हुआ सोना' हैं।
'मेरे रहते हिमाचल के हितों से समझौता नहीं'
सीएम ने कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि हिमाचल की शर्तें माने बिना कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि गृह मंत्री ने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए बिजली उत्पादन के खर्च का मुद्दा उठाया था, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि हिमाचल में कांग्रेस की सरकार है और राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अंततः समझौता हिमाचल के पक्ष में हुआ, जिससे राज्य को करीब 1,000 करोड़ रुपये की आय होने का रास्ता खुला।
हाइड्रो परियोजनाएं सरकार अपने हाथ में लेगी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार सतलुज, लुहरी और धौलासिद्ध जैसी जलविद्युत परियोजनाओं को वापस अपने नियंत्रण में लेने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में निजी प्रबंधन अधिकांश कमाई अपने पास रखता है, जबकि राज्य को बहुत कम हिस्सा मिलता है। ऐसी व्यवस्था हिमाचल के हित में नहीं है और सरकार इसे बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार का उद्देश्य हिमाचल के जल संसाधनों, प्राकृतिक संपदा और आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना है तथा प्रदेश के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।






