सरहदों से परे बंधा रिश्ता: सुजानपुर में विदेशी दूल्हे संग रुक्मिणी की शादी बनी प्यार की नई मिसाल
हमीरपुर के सुजानपुर की पहाड़ियों में इस बार सिर्फ शहनाइयां नहीं बजीं, बल्कि एक नई सोच, नए भारत और बदलती सामाजिक तस्वीर की गूंज भी सुनाई दी। कक्कड़ गांव की बेटी रुक्मिणी देवी ने साउथ अफ्रीका से आए अपने जीवनसाथी संग सात फेरे लेकर यह साबित कर दिया कि आज का प्यार सीमाओं में बंधा नहीं रहता वह दुनिया को जोड़ता है।
यह शादी सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं थी, बल्कि एक ऐसा पल था, जहां परंपरा और आधुनिकता ने हाथ थाम लिया। एक ओर हिमाचली रीति-रिवाज, देव संस्कृति और गांव की सादगी थी, तो दूसरी ओर सात समंदर पार से आया दूल्हा, जिसने इन सबको पूरे सम्मान और उत्साह के साथ अपनाया।
दोनों की मुलाकात चंडीगढ़ के एक कॉलेज में हुई जहां पढ़ाई के साथ शुरू हुई दोस्ती ने धीरे-धीरे भरोसे और समर्पण का रूप लिया। यह रिश्ता समय के साथ मजबूत होता गया और आखिरकार शादी के पवित्र बंधन में बदल गया।
जब बारात कक्कड़ गांव पहुंची, तो यह नजारा सिर्फ एक शादी का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संगम का था। विदेशी मेहमानों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच भाषा भले अलग रही हो, लेकिन मुस्कान और अपनापन एक जैसा था। दूल्हे ने पारंपरिक हिमाचली वेशभूषा पहनकर नाटी में हिस्सा लिया और यही पल इस शादी की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
रुक्मिणी के माता-पिता सूबेदार प्रीथी सिंह और सविता देवी के लिए यह सिर्फ बेटी की शादी नहीं, बल्कि एक गर्व का क्षण था जहां उनकी बेटी ने न सिर्फ अपना जीवनसाथी चुना, बल्कि अपनी संस्कृति को दुनिया के सामने सम्मान के साथ प्रस्तुत भी किया।
यह विवाह आज के उस भारत की झलक है, जहां परंपराएं मजबूत हैं, लेकिन सोच सीमित नहीं। जहां गांव की मिट्टी से जुड़ी बेटी वैश्विक पहचान के साथ अपना घर बसा रही है।
सुजानपुर की यह शादी एक संदेश है...कि
प्यार जब सच्चा हो, तो वह सिर्फ दो दिलों को नहीं, बल्कि दो देशों को भी जोड़ने की ताकत रखता है।












