भाईचारे की मिसाल बनी द्राबिल पंचायत, सर्वसम्मति से चुना गया पंचायत प्रतिनिधित्व
नाहन। सिरमौर में पंचायत चुनावों के बीच एक बार फिर भाईचारे और सहमति की मिसाल देखने को मिली है। शिलाई क्षेत्र की द्राबिल पंचायत ने लोकतंत्र को आपसी एकता और परंपरा के साथ जोड़ते हुए पूरे पंचायत पैनल को निर्विरोध चुन लिया। खास बात यह है कि यह वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां उत्तराखंड से हिमाचल प्रवास के दौरान चालदा महासू महाराज का पहला पड़ाव हुआ था। अब द्राबिल पंचायत जिले की पांचवीं निर्विरोध पंचायत बन गई है।
महासू महाराज मंदिर प्रांगण में आयोजित ग्रामीणों की बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों के चयन को लेकर सर्वसम्मति बनी। चुनावी मुकाबले की बजाय ग्रामीणों ने आपसी सहमति और भाईचारे के साथ पंचायत का गठन किया। गिरिपार क्षेत्र लंबे समय से दाईचारे और सामाजिक एकता के लिए जाना जाता है और द्राबिल पंचायत ने इस परंपरा को एक बार फिर मजबूत किया है।
ग्रामीणों के अनुसार चालदा महासू महाराज के पड़ाव के दौरान ही पंचायत को सर्वसम्मति से चुनने का निर्णय लिया गया था। पंचायत के पूर्व प्रधान मदन शर्मा ने बताया कि महासू महाराज के आशीर्वाद और ग्रामीणों की सहमति से पूरे पंचायत पैनल का चयन किया गया है। इसकी औपचारिक सूचना 15 मई को खंड विकास अधिकारी शिलाई को सौंपी जाएगी।
निर्विरोध चुने गए प्रतिनिधियों में दया देवी को प्रधान और गंगाराम को उपप्रधान चुना गया है। इसके अलावा वार्ड नंबर एक कयाना टापरा से प्रमिला देवी, वार्ड नंबर दो द्राबिल-1 से ज्ञान चंद शर्मा, वार्ड नंबर तीन द्राबिल-2 से इंदिरा देवी, वार्ड नंबर चार कियत चोटी से सविता देवी तथा वार्ड नंबर पांच नाउतू मशाना सोनोग से रघुवीर शर्मा को सदस्य चुना गया।
गौरतलब है कि इससे पहले टटियाना, दाड़ो देवरिया, शीना और शरली पंचायतें भी निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं। अब द्राबिल पंचायत का नाम भी इस सूची में जुड़ गया है, जिसे लोग लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द की बड़ी मिसाल मान रहे हैं।






