हिमाचल हाईकोर्ट की सरकार को फटकार, पूर्व CPS से खाली कराए जाएं सरकारी आवास
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) द्वारा सरकारी आवास खाली न करने और किराया न चुकाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
अदालत में दायर हलफनामे में खुलासा हुआ कि छह पूर्व CPS अब भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं। इतना ही नहीं, वे आवासों का लाइसेंस शुल्क भी जमा नहीं कर रहे और विधानसभा सचिवालय की ओर से उनके वेतन से किसी प्रकार की कटौती भी नहीं की जा रही है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पूर्व CPS अपनी वर्तमान पात्रता से कहीं अधिक बड़े और सुविधाजनक सरकारी आवासों का लाभ उठा रहे हैं, जो कानून के खिलाफ है।
राज्य सरकार ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) के अंतिम फैसले तक इन नेताओं को आवास में रहने की अनुमति दी गई है। लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल उनकी अयोग्यता और फैसले के पैरा-53 पर रोक लगाई है, न कि सरकारी सुविधाओं पर। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि सरकार ने अब तक आवासों का आवंटन रद्द करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अदालत के सख्त रुख के बीच राज्य सरकार ने 6 जून 2025 के उस निर्णय को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा है, जिसके तहत इन नेताओं को सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई अब 25 जून को होगी।
न्यायाधीशों के लिए आवास की कमी पर भी सख्ती
हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों को सरकारी आवास उपलब्ध न करवाने के मुद्दे पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि जिन आवासों में पूर्व CPS रह रहे हैं, वे हाईकोर्ट के समीप स्थित हैं और उनका उपयोग उन न्यायाधीशों के लिए किया जा सकता है, जिन्हें लंबी दूरी तय कर अदालत आना पड़ता है।
नवंबर 2024 में हटाए गए थे CPS
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को कांग्रेस सरकार द्वारा नियुक्त छह CPS को असंवैधानिक करार देते हुए पद से हटाने के आदेश दिए थे। अदालत ने 2006 के CPS एक्ट को भी निरस्त कर दिया था और सरकारी गाड़ी, बंगला, वेतन व स्टाफ जैसी सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से वापस लेने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामला अभी विचाराधीन है।






