उच्च अधिकारियों को सीधे पत्र लिखने पर सख्त हुई सरकार, नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उच्च अधिकारियों को सीधे पत्राचार करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाया है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में एक कड़ा मेमोरेंडम जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सेवा संबंधी सभी प्रस्ताव, शिकायतें और अनुरोध निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही भेजे जाएंगे।
सरकार के संज्ञान में आया है कि कई कर्मचारी और निचले स्तर के अधिकारी वेतन विसंगति, पदोन्नति, स्थानांतरण और अन्य मामलों को लेकर सीधे उच्च अधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में “एडवांस कॉपी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ऐसे पत्र भेजे जा रहे हैं, जबकि संबंधित प्रस्ताव विभाग के समक्ष औपचारिक रूप से प्रस्तुत ही नहीं किए गए।
कार्मिक विभाग ने इसे प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कहा है कि इससे कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। सरकार का मानना है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन होने से प्रशासन अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और पारदर्शी बनेगा।
जारी आदेश में कार्यालय मैनुअल के पैरा 8.5 का हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई भी कर्मचारी सीधे उच्च अधिकारियों को आवेदन या पत्र नहीं भेज सकता। इस संबंध में वर्ष 2018 में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन अब दोबारा सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मेमोरेंडम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केंद्रीय सिविल सेवा आचरण नियम, 1964 के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को अपने स्थानांतरण, पदस्थापन या अन्य सेवा मामलों में राजनीतिक अथवा बाहरी दबाव बनाने की अनुमति नहीं है। साथ ही कर्मचारियों को ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचने को कहा गया है, जो सरकारी सेवा की गरिमा के विपरीत हो।
सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। आदेश में चेतावनी दी गई है कि निर्देशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।






