ग्रामीणों की लाइफलाइन पर संकट, सुंदरनगर के 48 HRTC रूट बंद करने की तैयारी
सुंदरनगर: हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के बढ़ते घाटे को कम करने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नए निर्देशों के तहत ऐसे बस रूट, जिनकी प्रति किलोमीटर आमदनी 20 रुपये से कम है, उन्हें बंद करने की तैयारी की जा रही है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर सुंदरनगर डिपो पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जहां 48 घाटे वाले रूट चिन्हित किए गए हैं।
यदि इन सभी रूटों पर बस सेवाएं बंद कर दी जाती हैं, तो सुंदरनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए दैनिक आवागमन बड़ी चुनौती बन जाएगा। क्योंकि इन क्षेत्रों में निजी बस सेवाएं बेहद सीमित हैं और अधिकांश लोग सरकारी बसों पर ही निर्भर हैं।
छात्रों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की बढ़ेगी परेशानी
इन रूटों के बंद होने का सबसे अधिक असर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं, नौकरीपेशा लोगों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम से यात्रा करने वाले ग्रामीणों पर पड़ेगा। कई गांवों में HRTC ही एकमात्र सार्वजनिक परिवहन का साधन है। ऐसे में बस सेवा बंद होने से लोगों को लंबी दूरी पैदल तय करने या महंगे निजी वाहनों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
'जनसेवा के नजरिए से लिया जाए फैसला'
स्थानीय लोगों का कहना है कि HRTC केवल मुनाफा कमाने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण जनसेवा है। उनका सुझाव है कि घाटे वाले रूटों को पूरी तरह बंद करने के बजाय बसों के फेरे कम किए जाएं या बड़े वाहनों की जगह छोटी बसें चलाई जाएं। इससे निगम का खर्च भी कम होगा और ग्रामीणों को परिवहन सुविधा भी मिलती रहेगी।
क्षेत्रीय प्रबंधक ने नहीं दी प्रतिक्रिया
इस संबंध में जब सुंदरनगर डिपो के क्षेत्रीय प्रबंधक अजेंद्र चौधरी से संपर्क किया गया तो उन्होंने व्यस्तता और समयाभाव का हवाला देते हुए कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया और फोन काट दिया।
अब देखना होगा कि सरकार और HRTC घाटे को कम करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की परिवहन जरूरतों के बीच किस तरह संतुलन बनाती है। फिलहाल, संभावित रूट बंद होने की खबर से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों में चिंता का माहौल है।






