जिला परिषद और BDC की एक दिन की वैल्यू! CM सुक्खू के बयान पर बवाल!, शिवानी ठाकुर ने किया पलटवार
शिमला/हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के एक बयान को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री द्वारा जिला परिषद (ZP) और ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी (BDC) सदस्यों की राजनीतिक हैसियत को लेकर की गई टिप्पणी पर विपक्ष के साथ-साथ नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद सबसे तीखा जवाब हमीरपुर जिला परिषद चुनाव जीतकर चर्चा में आईं युवा जनप्रतिनिधि शिवानी ठाकुर की ओर से आया है। शिवानी ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान न केवल जिला परिषद और बीडीसी प्रतिनिधियों का अपमान है, बल्कि उन हजारों मतदाताओं का भी अनादर है जिन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने प्रतिनिधियों को चुना है।
क्या कहा था मुख्यमंत्री ने?
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, 'बीजेपी जिस प्रकार से 5 गुटों में बंटी है। वो बोल रहे है जिला परिषद में हमारे प्रत्याशी जीते हैं। भाई जिनको तुमने टिकट नहीं दिया उसकी जीत पर तुम कैसे क्लेम कर सकते हो? तुमने जो घोषित किया उसमें से 90-100 भी नहीं आए, 251 में से। ये जो बार-बार अपने मूंह मियां मिठ्ठू बनने की बात है। वक्त बताएगा। हमारे नेतृत्व में तीन चुनाव हुए है और तीनों चुनाव हमने जीते हैं। शिमला नगर निगम के चुनाव हुए दो तिहाई से जीता, 6 विधानसभा के चुनाव हुए। 6 में कांग्रेस 34 से 40 हुई। तीसरा पंचायत चुनाव हुए, जिसमें नगर निगम और नगर परिषद के चुनाव हम जीते। प्रधान हम जीते और उप प्रधान हम जीते। इन्ही प्रधान-उप्रधान की ही वैल्यू हैं। जिला परिषद और बीडीसी की कोई वैल्यू नहीं है। इनकी वैल्यू सिर्फ एक दिन की होती है'।
विपक्ष ने इसे स्थानीय निकायों के जनादेश का अपमान बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया, वहीं कई नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी इस पर नाराजगी जताई।
शिवानी ठाकुर का पलटवार
25 वर्षीय शिवानी ठाकुर, जिन्होंने जिला परिषद चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल कर प्रदेशभर में सुर्खियां बटोरी थीं, ने मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने कहा कि जिला परिषद और बीडीसी सदस्य जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं। ऐसे प्रतिनिधियों की भूमिका को कमतर आंकना उचित नहीं है।
शिवानी ठाकुर ने कहा, "मुख्यमंत्री प्रदेश के मुखिया हैं। उनके शब्दों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। इस तरह की टिप्पणी से नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का मनोबल गिरता है। जनता ने हमें अपने विश्वास के साथ चुना है और हम अपने क्षेत्र के विकास के लिए पूरी जिम्मेदारी से काम करेंगे।"
सीएम पर हमलावर हुई भाजपा
अब सीएम सुक्खू के इस बयान को लेकर भाजपा हमलावर हो गई है. राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने कहा कि कांग्रेस को लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान करना चाहिए और जनता के निर्णय को स्वीकार करना चाहिए. हार की हताशा में लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुने हुए प्रतिनिधियों और धार्मिक आस्थाओं पर टिप्पणी करना किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता।
वहीं, भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सीएम सुक्खू से माफी मांगने को कहा है. सुधीर शर्मा ने लिखा मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी चुने हुए प्रतिनिधियों का और मतदाताओं का अपमान है. इस टिप्पणी के लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
बड़ा सवाल
क्या मुख्यमंत्री के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया या फिर वास्तव में यह स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के महत्व को कमतर आंकने वाला बयान था? फिलहाल इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार अपने बयान का बचाव कर रही है, तो दूसरी तरफ नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधि और विपक्ष इसे जनादेश के सम्मान से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए हैं।






