KYC गड़बड़ियों से हजारों बुजुर्ग पेंशन से वंचित, सरकार योजनाएं रोक रही: जयराम ठाकुर
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि KYC (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया में गड़बड़ियों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में पात्र बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को बुढ़ापा पेंशन, सहारा योजना और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से इस समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है।
प्रेस बयान जारी करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से बुढ़ापा पेंशन और सहारा योजना को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उनका आरोप है कि तकनीकी खामियों और गलत KYC के कारण पात्र लाभार्थियों की पेंशन लंबे समय से रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को KYC के नाम पर जरूरतमंद लोगों की पेंशन रोकने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
बजट कटौती का भी लगाया आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यक और सामाजिक कल्याण विभाग के बजट को 1,618 करोड़ रुपये से घटाकर 604 करोड़ रुपये कर दिया है। उनका दावा है कि इसी वजह से कई सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार KYC जैसी तकनीकी कमियों की आड़ में बुढ़ापा पेंशन, सहारा पेंशन और अन्य योजनाओं को रोक रही है, जिसका खामियाजा पात्र लोगों को भुगतना पड़ रहा है। कई लाभार्थियों की पेंशन एक साल या उससे अधिक समय से शुरू नहीं हो सकी है।
सहारा योजना में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सहारा योजना के कई वास्तविक लाभार्थियों को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर उनकी पेंशन बंद कर दी गई है। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि बिना उचित सत्यापन के किसी भी व्यक्ति की पेंशन रोकना अन्याय है।
जांच और कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि बुढ़ापा पेंशन और सहारा योजना से जुड़े सभी लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही जिला स्तर पर सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोबारा सत्यापन कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, गलत KYC या प्रशासनिक गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।






