नाबालिग को देह व्यापार में धकेला... मां समेत 3 दोषियों को 10 साल की सजा; अदालत ने सुनाया फैसला
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में मानव तस्करी, नाबालिग से जबरन देह व्यापार कराने और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े एक सनसनीखेज मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश प्रकाश चंद राणा की अदालत ने पीड़ित नाबालिग की मां सहित तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने तीनों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है।
तीनों आरोपियों को मिली सजा
दोषी ठहराए गए आरोपियों में शिव शंकर उर्फ सिकंदर (मूल निवासी बरेली, उत्तर प्रदेश, वर्तमान पता जीरकपुर), नितिन जैन उर्फ मन्नू (करनाल, हरियाणा) और पीड़ित बच्ची की मां शामिल हैं। अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता (IPC), पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) और अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (Immoral Traffic Prevention Act) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया।
2018 में सामने आया था मामला
जिला न्यायवादी कुलभूषण गौतम के अनुसार यह मामला वर्ष 2018 में सामने आया था। 29 अप्रैल 2018 को चाइल्ड हेल्पलाइन मनाली की टीम पीड़ित नाबालिग को लेकर थाना मनाली पहुंची थी, जहां बच्ची की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मां ने ही धकेला देह व्यापार में
पुलिस जांच के दौरान बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए। जांच में सामने आया कि नाबालिग को जान से मारने की धमकी देकर जबरन देह व्यापार में धकेला गया था। पीड़िता ने अपने बयान में आरोप लगाया कि उसकी अपनी मां ने ही उसे इस अवैध धंधे में शामिल किया था।
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी शिव शंकर उर्फ सिकंदर ने पीड़िता की मां को हर महीने 40 हजार रुपये देने का लालच दिया था। पुलिस के अनुसार शिव शंकर और नितिन जैन मिलकर मानव तस्करी और देह व्यापार का नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
14 गवाहों और पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर फैसला
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 14 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और अन्य सबूत अदालत के समक्ष पेश किए। सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 साल के कठोर कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई।
न्याय की बड़ी मिसाल
अदालत के इस फैसले को मानव तस्करी, नाबालिगों के यौन शोषण और देह व्यापार जैसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण और कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह निर्णय ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।






