सिरमौर के लाल 'रविद्र राणा' ने फतह किया एवरेस्ट, विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर लहराया तिरंगा
शिलाई (सिरमौर): हौसले बुलंद हों तो दुनिया की कोई भी ऊंचाई इंसान के कदमों को रोक नहीं सकती। इस बात को सच साबित कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षेत्र स्थित शिलाई विधानसभा क्षेत्र के गांव मिल्ला के वीर सपूत रविंद्र राणा ने। भारतीय सेना के इस जांबाज जवान ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर न केवल अपने गांव और प्रदेश, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।
रविंद्र राणा भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज के सदस्य हैं और वर्तमान में देश की सबसे विशिष्ट सुरक्षा इकाई नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आतंकवाद विरोधी अभियानों और वीआईपी सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए प्रसिद्ध एनएसजी की 16 सदस्यीय विशेष टीम के साथ उन्होंने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
मात्र 20 दिनों में एवरेस्ट शिखर तक पहुंचकर बनाया नया कीर्तिमान
रविंद्र राणा ने बताया कि उनकी टीम ने नेपाल की राजधानी काठमांडू से अपना अभियान शुरू किया और केवल 20 दिनों में माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित किया। एवरेस्ट जैसे चुनौतीपूर्ण पर्वत पर इतनी कम अवधि में सफल आरोहण पर्वतारोहण जगत में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
एवरेस्ट पर गूंजे ‘भारत माता की जय’ के नारे
विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचने के बाद रविंद्र राणा और उनकी टीम ने वहां राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा तथा 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज का ध्वज फहराया। इस गौरवपूर्ण क्षण पर पूरी टीम ने राष्ट्रगान गाया और "भारत माता की जय" के गगनभेदी नारों से एवरेस्ट की चोटी को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
पिता की सैन्य विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं रविंद्र
रविंद्र राणा का जन्म गांव मिल्ला में पूर्व सैनिक स्वर्गीय उदेय राणा और माता सुरतो राणा के घर हुआ। उन्होंने अपने पिता की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाते हुए देश सेवा का मार्ग चुना और पिछले लगभग 11 वर्षों से 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं।
दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है एवरेस्ट अभियान
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई को दुनिया की सबसे कठिन पर्वतारोहण चुनौतियों में गिना जाता है। यहां पर्वतारोहियों को अत्यधिक ठंड, तेज बर्फीली हवाओं, ऑक्सीजन की कमी और अप्रत्याशित मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रविंद्र राणा ने अदम्य साहस, अनुशासन, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए सफलता का नया इतिहास रच दिया।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत
रविंद्र राणा की इस उपलब्धि से पूरे गिरिपार क्षेत्र, जिला सिरमौर और हिमाचल प्रदेश में गर्व और उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रविंद्र आज प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, देशभक्ति और समर्पण का प्रतीक है, जो यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और अथक मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
क्षेत्र में खुशी की लहर
रविंद्र राणा की इस ऐतिहासिक सफलता पर क्षेत्रवासियों, सामाजिक संगठनों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बधाई दी है। लोगों ने उम्मीद जताई है कि वह भविष्य में भी इसी तरह नई ऊंचाइयों को छूते हुए देश, प्रदेश और अपने गांव का नाम रोशन करते रहेंगे।
माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर रविंद्र राणा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमाचल की वीरभूमि आज भी देश को ऐसे सपूत दे रही है, जो अपने साहस और समर्पण से भारत का गौरव विश्व पटल पर बढ़ा रहे हैं।






