छोटा भंगाल-चौहार घाटियों में उमड़ रहे सैलानी, पर्यटन सीजन ने पकड़ी रफ्तार
रूपी ठाकुर, बरोट
छोटाभंगाल और चौहार घाटी को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से स्थान दिलाने की मांग वर्षों से उठती रही है, लेकिन इसके बावजूद सरकारी स्तर पर अपेक्षित प्रयास नहीं हो पाए हैं। फिर भी इन दोनों खूबसूरत और ठंडी घाटियों का आकर्षण देश-विदेश के पर्यटकों को लगातार अपनी ओर खींच रहा है। पर्यटन सीजन शुरू होने के साथ मार्च-अप्रैल से पर्यटकों की आवाजाही आरंभ हो गई थी, जबकि जून माह में यह संख्या और बढ़ गई है। वर्तमान में प्रतिदिन तीन से पांच सौ पर्यटकों के वाहनों की आमद दर्ज की जा रही है। इसके चलते क्षेत्र में स्थित सरकारी विश्राम गृह, निजी होटल, होम-स्टे, गेस्ट हाउस और कैंपिंग स्थल लगभग पूरी तरह बुक चल रहे हैं।
कई पर्यटकों को अग्रिम बुकिंग न मिलने के कारण लौटना भी पड़ रहा है। दोनों घाटियों में करीब 15 होटल, 12 रेस्ट हाउस, 25 होम-स्टे और 15 कैंपिंग स्थल संचालित हैं। कम हिमपात और मैदानी क्षेत्रों में समय से पहले बढ़ी गर्मी के कारण पर्यटक बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। बरोट, मुल्थान, राजगुंधा, प्लाचक, पनिहारटू, झटिंगरी, फुलाधार और सलियाहतर पास जैसे पर्यटन स्थल सैलानियों की पहली पसंद बने हुए हैं।
वहीं रोपड़ू, जीरो नाला, कोठी कोहड़ तथा लपास क्षेत्र के प्राकृतिक झरने भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पर्यटक ऊहल और लंबाडग नदियों के किनारे समय बिताकर ठंडी हवाओं का आनंद ले रहे हैं। बरोट स्थित दुर्गा माता मंदिर के समीप पंजाब राज्य बिजली बोर्ड द्वारा निर्मित ऊंचे जल फव्वारे का रोमांचकारी दृश्य भी पर्यटकों को खूब लुभा रहा है।
हालांकि, बढ़ती पर्यटक आवाजाही के चलते बरोट-घटासनी, मुल्थान-लोहारडी और मुल्थान-बड़ा ग्रां मार्गों पर घंटों जाम लग रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने पर्यटन सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख स्थलों पर साइन बोर्ड लगाने और अतिरिक्त पुलिस कर्मियों की तैनाती की मांग की है।






