गगल एयरपोर्ट के पास करोड़ों का जमीन घोटाला! फर्जी कृषक बनकर खरीदी 100 कनाल से ज्यादा जमीन, विजिलेंस ने दर्ज किया केस
शिमला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में गगल एयरपोर्ट के आसपास कथित तौर पर धारा-118 के उल्लंघन के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध जमीन खरीद-फरोख्त का बड़ा मामला सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा होने के बाद विजिलेंस ने मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। आरोप है कि फर्जी कृषक प्रमाणपत्र तैयार कर 100 कनाल से अधिक कृषि भूमि खरीदी गई और बाद में उसे बेचकर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया गया।
SIT जांच में खुला बड़ा खेल
विजिलेंस की प्रारंभिक जांच और एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत से खुद को कृषक दर्शाने वाले फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। इन दस्तावेजों के आधार पर अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर 100 कनाल से अधिक कृषि भूमि खरीदी गई। बाद में इस भूमि को ऊंचे दामों पर बेचकर करोड़ों रुपये का लाभ अर्जित किया गया।
1998 से शुरू हुआ पूरा मामला
जांच में सामने आया कि वर्ष 1998 में कांगड़ा निवासी एक गैर-कृषक व्यक्ति ने धारा-118(2)(डीडी) के तहत कुछ भूमि खरीदी थी। कानून के अनुसार भूमि अभिलेखों में उसे गैर-कृषक के रूप में दर्ज किया जाना अनिवार्य था, लेकिन तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने जमाबंदी और म्यूटेशन रिकॉर्ड में यह आवश्यक टिप्पणी दर्ज नहीं की।
इस कथित लापरवाही का फायदा उठाते हुए आरोपी ने बिना धारा-118 की अनुमति के 61.84 कनाल कृषि भूमि खरीदी, जबकि उसकी पत्नी ने 44.43 कनाल भूमि अपने नाम पर खरीद ली। जांच में आरोप है कि इन खरीद-फरोख्त के लिए फर्जी कृषक प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया।
कई राजस्व अधिकारी जांच के दायरे में
जांच में तीन मुख्य आरोपियों के अलावा राजस्व विभाग के तत्कालीन पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सब-रजिस्ट्रार समेत कई सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
अवैध कमाई के स्रोतों की भी होगी जांच
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने खरीदी गई कृषि भूमि को बाद में अलग-अलग लोगों के नाम स्थानांतरित कर करोड़ों रुपये की कमाई की। अब विजिलेंस न केवल जमीन सौदों की जांच कर रही है, बल्कि इन सौदों से अर्जित अवैध संपत्ति और आय के स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है।
क्या है धारा-118?
हिमाचल प्रदेश किरायेदारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा-118 राज्य की कृषि भूमि की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान है। इसके तहत राज्य के बाहर के व्यक्ति या गैर-कृषक बिना राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के हिमाचल प्रदेश में कृषि भूमि नहीं खरीद सकते।
इस कानून का उद्देश्य प्रदेश के किसानों के हितों की रक्षा करना, सीमित कृषि भूमि को बाहरी खरीद से बचाना और भूमि के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोकना है। यदि कोई गैर-कृषक निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर भूमि खरीदता है या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद को कृषक दर्शाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
फिलहाल विजिलेंस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए दस्तावेजों, भूमि रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं।






