हिमाचल में लागू हुई नई शिक्षक पुरस्कार नीति, अब काम बोलेगा, सेवा अवधि नहीं
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षकों को सम्मानित करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 'हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार योजना-2026' लागू कर दी है। नई नीति के तहत अब राज्य शिक्षक पुरस्कार केवल सेवा अवधि या वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि कक्षा में किए गए उत्कृष्ट शिक्षण कार्य, विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम, नवाचार, डिजिटल शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए दिए गए योगदान के आधार पर प्रदान किए जाएंगे।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद शिक्षा विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही 19 जुलाई 2024 से लागू 'हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार योजना-2024' स्वतः समाप्त हो गई है। नई योजना ई-गजट में प्रकाशित होने की तिथि से प्रभावी होगी।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को मिलेगा सम्मान
नई व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। पहली बार चयन प्रक्रिया में विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, प्रभावी शिक्षण पद्धति, डिजिटल तकनीक के उपयोग, स्कूल कॉम्प्लेक्स एवं क्लस्टर प्रणाली के सफल संचालन, पुस्तकालय एवं रीडिंग रूम के विकास, उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा में नवाचार जैसे मानकों को प्रमुख आधार बनाया गया है।
इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब पुरस्कार लंबे अनुभव के बजाय शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट परिणाम देने वाले शिक्षकों को प्राथमिकता देकर प्रदान किए जाएंगे।
31 शिक्षकों को मिलेगा राज्य शिक्षक पुरस्कार
नई योजना के तहत इस वर्ष प्रदेश के 31 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
25 नियमित राज्य शिक्षक पुरस्कार
16 पुरस्कार सामान्य क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षकों के लिए।
9 पुरस्कार जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए।
6 विशेष पुरस्कार उन शिक्षकों को दिए जाएंगे जिन्होंने शिक्षा में नवाचार, राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन अथवा शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया हो।
कौन होंगे पात्र?
राज्य के सरकारी प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के साथ-साथ जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी) में कार्यरत शिक्षक, मुख्य अध्यापक और प्रधानाचार्य इस पुरस्कार के लिए पात्र होंगे।
सम्मान के रूप में मिलेंगी ये सौगातें
पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को स्मृति चिन्ह, पदक, प्रशस्ति-पत्र, प्रमाण-पत्र, हिमाचली टोपी अथवा स्कार्फ, शॉल, पुस्तक सहित अन्य सम्मान सामग्री प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया होगी अधिक पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित
शिक्षा विभाग के अनुसार नई योजना का उद्देश्य शिक्षकों को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करना, शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार लाना और समाज में शिक्षक पेशे की प्रतिष्ठा को और अधिक मजबूत बनाना है। योजना के तहत दिए जाने वाले छह विशेष पुरस्कारों का चयन राज्य स्तरीय समिति की सिफारिश पर किया जाएगा।
विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था से चयन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और गुणवत्ता आधारित बनेगी, जिससे वास्तव में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने का उद्देश्य सफल होगा।






