शिमला जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को नोटिस; 17 अगस्त को अगली सुनवाई
शिमला जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हो रही देरी को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुनाव में देरी पर जवाब मांगा है। डीसी शिमला और मुख्य सचिव के माध्यम से सरकार को यह नोटिस भेजा गया है।
नवनिर्वाचित जिला परिषद सदस्यों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार से अगली सुनवाई से पहले चुनाव में हो रही देरी का कारण स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी।
दरअसल, 6 जून को 25 जिला परिषद सदस्यों को शपथ दिलाई गई थी, लेकिन करीब ढाई महीने बीतने के बाद भी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका है। प्रशासन की ओर से 27 जून और 3 अगस्त को बैठकें बुलाई गईं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि चुनाव प्रक्रिया को बिना ठोस वैधानिक कारण के लंबित रखा जा रहा है। उनका कहना है कि अध्यक्ष के चुनाव में देरी से जिला परिषद का गठन अधूरा है, जिसका असर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है।
25 सदस्यीय जिला परिषद में 11 भाजपा समर्थित, 10 कांग्रेस समर्थित और 4 निर्दलीय सदस्य हैं। भाजपा को दो निर्दलीय सदस्यों का समर्थन मिलने का दावा है। अब हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सरकार और प्रशासन को चुनाव में देरी पर अपना जवाब देना होगा।






