भोरंज कॉलेज में QR कोड से लगेगी हाजिरी, बना प्रदेश का पहला सरकारी कॉलेज
राजकीय महाविद्यालय भोरंज ने डिजिटल शिक्षा की दिशा में नई पहल करते हुए प्रदेश का पहला सरकारी महाविद्यालय बनने का गौरव हासिल किया है, जहां विद्यार्थियों की उपस्थिति अब क्यूआर (QR) कोड आधारित ऑनलाइन प्रणाली से दर्ज की जाएगी। इस नई व्यवस्था से विद्यार्थियों की हाजिरी डिजिटल माध्यम से दर्ज होगी और शिक्षकों का रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य भी आसान हो जाएगा।
महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. प्रिंस ठाकुर तथा बीसीए के विद्यार्थियों प्रणव और अक्षय ने मिलकर इस मोबाइल एप का विकास किया है। यह एप फिलहाल केवल राजकीय महाविद्यालय भोरंज के लिए तैयार की गई है और इसका उपयोग केवल शिक्षक ही करेंगे।
नई प्रणाली के तहत विद्यार्थियों की उपस्थिति के आधार पर फाइन की गणना और इंटरनल असेसमेंट के अंक भी स्वतः तैयार हो जाएंगे। इससे शिक्षकों को अलग से मैनुअल रिकॉर्ड तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की भी बचत होगी। महाविद्यालय में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें क्यूआर कोड आधारित उपस्थिति प्रणाली का लाइव प्रदर्शन किया गया।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को एप के संचालन और इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विजय ठाकुर ने इस नवाचार की सराहना करते हुए सभी शिक्षकों को कक्षाओं में इसी प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर मोहिंद्र गुलेरिया सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक और कर्मचारी भी उपस्थित रहे। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक शिक्षक की प्रोफाइल एप में बनाई गई है और एप उनके मोबाइल फोन में इंस्टॉल की गई है। विद्यार्थियों को अपने मोबाइल में कोई एप डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी। शिक्षक कक्षा में पहुंचकर अपने मोबाइल पर एक QR कोड प्रदर्शित करेंगे। विद्यार्थी अपने मोबाइल के कैमरे या गूगल लेंस से उस कोड को स्कैन करेंगे।
इसके बाद खुलने वाली वेबसाइट पर अपना रोल नंबर दर्ज कर "I Am Present" विकल्प पर क्लिक करेंगे और उनकी उपस्थिति दर्ज हो जाएगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए QR कोड हर 10 सेकेंड में स्वतः बदल जाएगा। इसके अलावा एक मोबाइल फोन से एक दिन में केवल एक बार ही स्कैन किया जा सकेगा।
यदि किसी तकनीकी कारण से QR कोड स्कैन नहीं हो पाता है, तो एप में मैनुअल मोड की सुविधा भी दी गई है, जिससे शिक्षक विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज कर सकेंगे। शुरुआती कुछ महीनों तक पारंपरिक उपस्थिति रजिस्टर भी साथ-साथ चलाया जाएगा, ताकि नई प्रणाली का सुचारु परीक्षण किया जा सके।






