HPU में भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप, SFI ने मांगी न्यायिक जांच
शिमला: स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) इकाई ने विश्वविद्यालय में कथित भर्ती अनियमितताओं, विश्वविद्यालय अधिनियम की अवहेलना, प्रशासनिक भेदभाव और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कुलपति को दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे हैं। संगठन ने इन मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच करवाने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
एसएफआई का आरोप है कि विश्वविद्यालय में विभिन्न नियुक्तियों के दौरान भर्ती नियमों और निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि कुछ मामलों में आवेदन की अंतिम तिथि के बाद जारी दस्तावेजों को भी चयन प्रक्रिया में मान्यता दी गई। एसएफआई के अनुसार इससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांत पर सवाल खड़े होते हैं।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि एक मामले में आरक्षित वर्ग से संबंधित दस्तावेज आवेदन की अंतिम तिथि के काफी समय बाद जारी हुए थे। एसएफआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में सभी आदेश और अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग की है।
दूसरे ज्ञापन में एसएफआई ने विश्वविद्यालय अधिनियम, 1970 की एक धारा के कथित उल्लंघन, एक महिला शिक्षिका को विदाई समारोह में शामिल न किए जाने और प्रशासनिक असंवेदनशीलता का मुद्दा भी उठाया है। इसके अलावा संगठन ने विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति का बोझ छात्रों पर फीस वृद्धि के रूप में न डालने की मांग करते हुए हाल ही में बढ़ाई गई फीस वापस लेने और राज्य सरकार से विशेष आर्थिक सहायता पैकेज उपलब्ध कराने की मांग की है।
एसएफआई का दावा है कि उसके पास आरटीआई के माध्यम से प्राप्त करीब 13 हजार पृष्ठों के दस्तावेज मौजूद हैं और आने वाले समय में इन अभिलेखों के आधार पर अन्य मामलों से जुड़े और खुलासे भी किए जाएंगे।






