HRTC कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव तेज, झुकने को तैयार नहीं सुक्खू सरकार; बस सेवाएं जारी रखने के लिए निकाली टेम्परेरी भर्ती
शिमला। हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) कर्मचारियों और प्रदेश सरकार के बीच चल रहा टकराव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। एक ओर चालक-परिचालक यूनियन लंबित वित्तीय देयों और अन्य मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी चक्का जाम की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर सुक्खू सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए निगम सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित कर दिया है और बस सेवाएं बाधित न हों इसके लिए 650 से अधिक अस्थायी चालकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है।
HRTC प्रबंधन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार प्रदेशभर के विभिन्न डिपो और इकाइयों में दिन-प्रतिदिन के आधार पर 650 से अधिक अस्थायी HTV चालकों की नियुक्ति की जाएगी। चयनित चालकों को प्रतिदिन ₹1500 मानदेय दिया जाएगा। यह नियुक्ति पूरी तरह अस्थायी होगी और इससे नियमित नौकरी, वरिष्ठता या स्थायी समायोजन का कोई अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
सरकार और यूनियन की वार्ता रही बेनतीजा
मंगलवार को सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) की अध्यक्षता में हुई बैठक से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। बैठक के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने यूनियन प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह के शिमला से चंबा तबादले का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और इसे तत्काल रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। सहमति न बनने पर यूनियन प्रतिनिधि बैठक छोड़कर बाहर आ गए, जिसके बाद अन्य मांगों पर चर्चा भी नहीं हो सकी।
ESMA लागू, हड़ताल पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
प्रदेश सरकार ने 23 जून को जारी अधिसूचना के तहत HRTC सेवाओं को Essential Services Maintenance Act (ESMA) के दायरे में लाते हुए आवश्यक सेवा घोषित कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कानून के तहत हड़ताल करना या उसमें भाग लेना प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने यह भी कहा कि जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और अस्थायी चालकों की भर्ती उसी रणनीति का हिस्सा है।
जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरा
इस पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों को सुनने के बजाय सरकार का तानाशाहीपूर्ण रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सरकार से टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद और सहमति के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
24 जून रात 12 बजे से चक्का जाम की चेतावनी
उधर, सचिवालय में वार्ता विफल होने के बाद यूनियन नेताओं और कर्मचारियों ने शिमला के पुराने बस अड्डे पर सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद यूनियन ने 24 जून की रात 12 बजे से पूरे प्रदेश में चक्का जाम शुरू करने की अंतिम घोषणा कर दी।
अब प्रदेश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच अंतिम समय में कोई समझौता होता है या फिर हिमाचल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बड़े संकट का सामना करेगी।






