निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस में बगावत: शिमला में धरने पर बैठे ये वरिष्ठ नेता, संगठन पर उठे गंभीर सवाल
शिमला। हिमाचल प्रदेश में निकाय चुनावों की आहट के बीच कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। सत्तारूढ़ दल में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब उस स्तर पर पहुंच गई है, जहां पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता ने शिमला स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया है। इस घटनाक्रम ने संगठन की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और सुक्खू सरकार के साथ-साथ पार्टी संगठन में चल रही भीतरघात जैसी नाराजगी को भी सार्वजनिक कर दिया है।
24 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठे पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष
सिरमौर जिले के भंगाणी जोन के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप चौहान ने पांवटा साहिब ब्लॉक अध्यक्ष की नियुक्ति के विरोध में 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है। उनका आरोप है कि संगठनात्मक नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पद दिए जा रहे हैं जिन पर कार्यकर्ताओं का भरोसा नहीं है।
“वफादारों की अनदेखी और अवसरवादियों को पद”
धरने पर बैठे प्रदीप चौहान ने संगठन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर “मौकापरस्त नेताओं” को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। उनका मुख्य विरोध सरदार हरप्रीत रतन की नियुक्ति को लेकर है।
चौहान का दावा है कि हरप्रीत रतन विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे और अब वापसी के बाद उन्हें ब्लॉक अध्यक्ष बना दिया गया, जिसे वह कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय बता रहे हैं।
हटाने की मांग और दिल्ली तक आंदोलन की चेतावनी
प्रदीप चौहान ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि सरदार हरप्रीत रतन को तत्काल पद से हटाया जाए और गिरिपार क्षेत्र से किसी समर्पित कार्यकर्ता को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को दिल्ली तक ले जाया जाएगा। चौहान ने कहा कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के समक्ष भी यह मुद्दा उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर अनशन करेंगे।
71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची बनी विवाद की जड़
गौरतलब है कि हाल ही में जारी 71 ब्लॉक अध्यक्षों की सूची के बाद से ही कांग्रेस संगठन में असंतोष के स्वर तेज हो गए थे। शुरुआत में महिला प्रतिनिधित्व न होने को लेकर सवाल उठे, इसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय की उपेक्षा के आरोप सामने आए और अब क्षेत्रीय असंतुलन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
गिरिपार क्षेत्र की अनदेखी पर नाराजगी
प्रदीप चौहान ने कहा कि गिरिपार क्षेत्र को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इस क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का योगदान सिर्फ नारे लगाने तक ही सीमित रह गया है।
चुनाव से पहले बढ़ी पार्टी की चिंता
निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर उठी यह खुली बगावत पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत मानी जा रही है। विपक्ष को भी इस मुद्दे के जरिए सरकार और संगठन को घेरने का अवसर मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक असंतोष को नहीं सुलझाया गया, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
शिमला स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर अपने ही वरिष्ठ नेता का धरने पर बैठना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर संवाद और समन्वय की कमी गहराती जा रही है। जो पार्टी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही थी, वही अब अंदरूनी विरोध के कारण मुश्किल हालात का सामना करती दिखाई दे रही है।












