चारों नगर निगमों में जनरल श्रेणी से चुने जाएंगे मेयर, सरकार ने जारी किया रोस्टर
शिमला। हिमाचल प्रदेश के चार नगर निगमों में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद महापौर पद के आरक्षण रोस्टर को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सोलन, पालमपुर, मंडी और धर्मशाला नगर निगमों में महापौर के पद को पांच वर्षों के लिए अनारक्षित (जनरल) घोषित कर दिया है।
इस संबंध में शहरी विकास विभाग ने बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी। जानकारी के अनुसार, प्रधान सचिव (शहरी विकास) देवेश कुमार ने मंगलवार को रोस्टर से संबंधित फाइल पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी गई।
63 वार्डों में चुने गए नए पार्षद
चारों नगर निगमों के चुनाव परिणाम पहले ही घोषित हो चुके हैं और कुल 63 वार्डों में नए पार्षदों का चुनाव हो चुका है। चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों, निर्वाचित पार्षदों और महापौर पद के संभावित दावेदारों की नजर आरक्षण रोस्टर पर टिकी हुई थी।
हालांकि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सरकार की ओर से महापौर पद के आरक्षण को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया था। इसके चलते संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई थी तथा वे अपनी अंतिम रणनीति तय नहीं कर पा रहे थे।
विधि विभाग से मंजूरी के बाद जारी हुई अधिसूचना
सूत्रों के अनुसार, शहरी विकास विभाग ने आरक्षण रोस्टर का प्रस्ताव तैयार कर उसे विधि विभाग के पास भेजा था। विधि विभाग से फाइल वापस आने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब अधिसूचना जारी कर दी गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद चारों नगर निगमों में महापौर पद के लिए दावेदारी करने वाले पार्षदों के लिए रास्ता साफ हो गया है। अब सभी की नजर महापौर और उपमहापौर के चुनाव पर टिकी हुई है, जहां राजनीतिक समीकरण अहम भूमिका निभाएंगे।






