CM सुक्खू की फटकार के बाद GAD ने विड्रा की नोटिफिकेशन, अब फिर 1200 रुपये में मिलेंगे हिमाचल भवन के कमरे
शिमला: हिमाचल प्रदेश की (GAD) को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कड़ी फटकार के बाद बड़ा यू-टर्न लेना पड़ा है। शिमला, दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन और हिमाचल सदनों में कमरों के बढ़े हुए किराए को लेकर जारी की गई नोटिफिकेशन को विभाग ने वापस ले लिया है। अब आम लोगों को फिर से पुराने दर 1200 रुपये में ही कमरे उपलब्ध होंगे।
क्या था पूरा मामला?
हाल ही में GAD ने हिमाचल भवन और सदनों में ठहरने के लिए कमरों के किराए में भारी बढ़ोतरी कर दी थी। नई दरों के लागू होते ही आम लोगों, कर्मचारियों, पेंशनरों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले मरीजों के बीच असंतोष फैल गया। कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने भी इस फैसले का खुलकर विरोध किया।
दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहरों में स्थित हिमाचल भवन लंबे समय से हिमाचल के लोगों के लिए सस्ती और सुरक्षित ठहरने की सुविधा रहे हैं। ऐसे में किराया बढ़ोतरी को सीधे तौर पर आम आदमी पर आर्थिक बोझ के रूप में देखा गया।
CM के हस्तक्षेप के बाद बदला फैसला
जैसे ही यह मामला मुख्यमंत्री सुक्खू के संज्ञान में आया, उन्होंने इस पर सख्त रुख अपनाया। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जनहित के खिलाफ कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत नोटिफिकेशन वापस लेने और पुराने रेट बहाल करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की इस सख्ती के बाद GAD ने बिना देरी किए आदेशों में संशोधन किया और बढ़े हुए किराए को निरस्त कर दिया।
आम लोगों को मिली बड़ी राहत
सरकार के इस फैसले से खास तौर पर उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो इलाज, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी काम या अन्य कारणों से दिल्ली और चंडीगढ़ जाते हैं। ₹1200 में कमरा मिलना उनके लिए बड़ी सहूलियत है, क्योंकि निजी होटलों के मुकाबले यह काफी सस्ता विकल्प है।
विपक्ष और संगठनों का दबाव भी बना कारण
किराया बढ़ोतरी के फैसले के बाद विपक्षी दलों और कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बनाया था। उनका कहना था कि यह फैसला आम जनता के हितों के खिलाफ है। लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार का यह यू-टर्न राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
सरकार का साफ संदेश
इस पूरे घटनाक्रम से यह संदेश साफ है कि मुख्यमंत्री सुक्खू जनता से जुड़े मुद्दों पर बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने विभागों को भविष्य में ऐसे फैसले लेने से पहले आम लोगों पर उसके प्रभाव का गंभीरता से आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस मामले ने GAD की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। बिना व्यापक विचार-विमर्श और जनहित का आकलन किए इतना बड़ा फैसला लेना प्रशासनिक स्तर पर चूक माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस तरह की गलतियों को रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाती है।












