13 साल की बच्ची के दिल में था छेद, टांडा में सर्जरी
हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े दूसरे अस्पताल टांडा में डॉक्टरों ने चंबा के भरमौर की 13 वर्षीय बच्ची, जो जन्म से ही एक दुर्लभ हृदय दोष (एएसडी विद कॉर्टियाट्रियम) से पीडि़त थी, की सफल हार्ट सर्जरी की है। मातापिता के अनुसार, बच्ची में आठ महीने की उम्र से ही तेज हृदय गति, होठों का नीला पडऩा, वजन न बढऩा, सांस लेने में तकलीफ, बार-बार छाती में संक्रमण जैसे लक्षण थे। टांडा के सीटीवीएस विभाग ने मूल्यांकन पर पाया कि बच्ची के दिल में बड़ा छेद था। दिल की कुछ नसों का असामान्य संबंध था। दिल कक्षों का आकार बढ़ा हुआ था और शरीर में रक्त की आपूर्ति भी बाधित थी। दूर के उच्च स्वास्थ्य संस्थान में जाने में असमर्थता और खराब वित्तीय स्थिति के कारण बच्ची का पहले ऑपरेशन नहीं हो सका। अब टांडा के सीटीवीएस विभाग ने सफल हार्ट सर्जरी कर बच्ची को नया जीवन दिया है। हिमकेयर ने इस मामले में सभी खर्चों का ध्यान रखा। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत ठीक है।
कॉलेज प्रिंसिपल ने दी टीम को बधाई
बच्ची के इतने बड़े सफल ऑपरेशन पर टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर मिलाप शर्मा ने समस्त डॉक्टरों की टीम को बधाई दी और बच्ची के जल्द स्वास्थ होने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि यह बीमारी 10 लाख में से सिर्फ एक व्यक्ति को होती है, जिसमें से पीडि़त उक्त बच्ची का टांडा में सफल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने मिसाल कायम की है।
सर्जरी करने वाली टीम में ये डॉक्टर रहे शामिल
सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. देशबंधु शर्मा (एचओडी), डॉ. विकास पंवार, डॉ. पुनीत शर्मा शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. भारती गुप्ता, डॉ. अमन शर्मा, डॉ. निधि और सीटीवीएस और एनेस्थीसिया के पैरामेडिकल स्टाफ शामिल थे।












