हिमाचल में महंगाई का नया झटका: डिपुओं में 7 रुपये महंगा हुआ सरसों तेल
महंगाई की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश के 19 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों को एक और झटका लगा है। प्रदेश के उचित मूल्य की दुकानों (डिपुओं) के माध्यम से रियायती दरों पर मिलने वाला सरसों का तेल अब पहले से महंगा मिलेगा। नए स्टॉक के आने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति लीटर सरसों तेल के लिए 7 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।
तेल का नया स्टॉक डिपुओं तक नहीं पहुंचा
प्रदेश के हजारों परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के लिए डिपुओं से मिलने वाले खाद्य तेल पर निर्भर हैं। ऐसे में कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के घरेलू बजट पर सीधा असर डाल सकती है। स्थिति यह है कि डिपुओं में सरसों तेल का पुराना स्टॉक समाप्त हो चुका है और नया स्टॉक अभी तक नहीं पहुंच पाया है, जिसके कारण कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को जून माह का तेल कोटा भी नहीं मिल रहा है।
हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने आगामी तीन महीनों की जरूरत को देखते हुए 82 लाख लीटर सरसों तेल की आपूर्ति के लिए ऑर्डर जारी किया है। हालांकि विभिन्न कारणों से तेल की नई खेप प्रदेश में पहुंचने में देरी हो रही है। निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल ने बताया कि सरसों तेल की खेप पहुंचते ही प्रदेशभर के डिपुओं में तेल का कोटा उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
7 रुपए महंगा हुआ तेल
अब तक एपीएल और बीपीएल उपभोक्ताओं को डिपुओं के माध्यम से सरसों तेल 153 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा था, लेकिन नए स्टॉक के साथ इसकी कीमत बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। वहीं टैक्स पेयर उपभोक्ताओं को अब 167 रुपये प्रति लीटर की दर से तेल खरीदना होगा, जबकि पहले यह 157 रुपये प्रति लीटर उपलब्ध था।
ग्रामीण क्षेत्रों के कई डिपुओं में उपभोक्ताओं को मई माह में भी सरसों तेल नहीं मिल पाया था। ऐसे में लोग अब नए स्टॉक के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। कीमतों में बढ़ोतरी और आपूर्ति में देरी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।






