KNH गायनी विभाग की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और अस्पताल प्रशासन से मांगा जवाब
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कमला नेहरू राज्य अस्पताल (केएनएच) के प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनी) विभाग को आईजीएमसी शिमला स्थानांतरित करने के प्रस्तावित निर्णय पर गंभीर रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत जवाब तलब किया है।
अदालत ने केएनएच के चिकित्सा अधीक्षक को भी मामले में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल को हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा गया है कि वर्तमान में केएनएच में विभाग के लिए कितनी जगह उपलब्ध है और आईजीएमसी में प्रस्तावित स्थान उसकी तुलना में पर्याप्त है या नहीं।
सुनवाई के दौरान आम जनता की ओर से अदालत में एक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें विभाग की शिफ्टिंग को पूर्व नियोजित और नीतिगत फैसला बताते हुए कई सवाल उठाए गए। प्रतिवेदन में कहा गया कि हाल ही में केएनएच में ओपीडी, लैब और आधुनिक ऑपरेशन थिएटर विकसित करने पर करीब 22 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ऐसे में विभाग को स्थानांतरित करने से यह निवेश प्रभावित हो सकता है।
प्रतिवेदन में यह भी दावा किया गया कि आईजीएमसी का प्रस्तावित क्षेत्र अपेक्षाकृत ठंडे और छायादार हिस्से में स्थित है, जहां सर्दियों में ब्लैक आइस बनने का खतरा रहता है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी हो सकती है। इसके विपरीत केएनएच को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान बताया गया है।
इसके अलावा आवेदन में आरोप लगाया गया है कि गायनी विभाग को हटाकर केएनएच परिसर की भूमि को अन्य उपयोग, विशेषकर विधायकों के आवास निर्माण के लिए खाली कराने की योजना बनाई जा रही है। हाईकोर्ट ने सरकार को इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देने और यह बताने के निर्देश दिए हैं कि शिफ्टिंग के बाद खाली होने वाले क्षेत्र का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा।
वहीं, आईजीएमसी प्रशासन की ओर से दायर स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि विभाग का स्थानांतरण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। यह प्रक्रिया विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और उपलब्ध बुनियादी ढांचे के आधार पर आगे बढ़ेगी। रिपोर्ट के अनुसार आईजीएमसी के कुछ सुपर-स्पेशियलिटी विभागों को चमियाणा स्थित Atal Institute of Medical Super Specialities में स्थानांतरित किया जा चुका है, जिससे खाली हुई जगह को गायनी विभाग के लिए चिन्हित किया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित की है, जहां सरकार और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखना होगा।






