हिमाचल में EWS विद्यार्थियों को बड़ा तोहफा, फार्मेसी संस्थानों में मिलेंगी 10% अतिरिक्त सीटें
शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए फार्मेसी कॉलेजों और डिप्लोमा इन फार्मेसी (D.Pharmacy) संस्थानों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था लागू कर दी है। तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को फार्मेसी क्षेत्र में करियर बनाने के अधिक अवसर मिल सकेंगे।
राज्यपाल द्वारा जारी आदेशों के अनुसार ये सीटें संस्थानों की स्वीकृत प्रवेश क्षमता (Approved Intake) से अलग होंगी और इन्हें सुपरन्यूमेरेरी सीटों के रूप में माना जाएगा। यानी इन सीटों के जुड़ने से अन्य श्रेणियों की मौजूदा सीटों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन सीटों का लाभ केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जिन्हें सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध EWS प्रमाण-पत्र प्राप्त होगा। किसी भी शैक्षणिक संस्थान को स्वयं किसी छात्र को EWS श्रेणी का लाभ देने का अधिकार नहीं होगा। साथ ही यदि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान EWS की सीटें खाली रह जाती हैं, तो उन्हें किसी अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जाएगा और वे रिक्त ही रहेंगी।
PCI के निर्देशों के बाद लिया गया फैसला
यह निर्णय फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। PCI ने 20 मार्च 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया था कि EWS सीटों को सुपरन्यूमेरेरी श्रेणी में रखा जाए और इन्हें संस्थानों की नियमित प्रवेश क्षमता का हिस्सा न माना जाए।
इसी आधार पर तकनीकी शिक्षा विभाग ने इन सीटों को आरक्षण रोस्टर से अलग रखा है। परिणामस्वरूप पहले से लागू 200-बिंदु आरक्षण रोस्टर केवल नियमित सीटों पर ही लागू होगा, जबकि EWS के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीटें अलग से संचालित की जाएंगी।
दस्तावेजों की होगी कड़ी जांच
सरकार ने प्रवेश समितियों और संबंधित पंजीकरण प्राधिकरणों को EWS श्रेणी के अंतर्गत होने वाले सभी प्रवेशों की गहन जांच और सत्यापन के निर्देश दिए हैं। पात्रता, प्रमाण-पत्रों और अन्य दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच की जाएगी ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र विद्यार्थियों तक ही पहुंचे।
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में अधिक अवसर प्रदान करना, प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और निर्धारित नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करना है।






