हिमाचल में महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल, अपराधों ने तोड़ा 10 साल का रिकॉर्ड
शिमला: हिमाचल प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से लेकर अप्रैल 2026 तक महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 1820 तक पहुंच गई, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है।
हाल के दिनों में सामने आई घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंडी जिले में एक महिला की तेजाब फेंककर हत्या और कोटली क्षेत्र में पेट्रोल छिड़ककर महिला की हत्या जैसे मामलों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। वहीं न्यायालय परिसर भी महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं दिख रहे हैं।
बीते शुक्रवार मंडी कोर्ट परिसर में पेशी के लिए पहुंची रीमा नामक महिला पर उसके पति मुकेश कुमार ने कथित तौर पर बोतल में भरा तरल पदार्थ फेंक दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2016 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 1216 मामले दर्ज हुए थे। इसके बाद हर वर्ष मामलों में बढ़ोतरी होती रही और वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 1700 तक पहुंच गया। वर्ष 2022 और 2023 में मामूली कमी दर्ज हुई, लेकिन 2024 और 2025 में अपराधों का ग्राफ फिर तेजी से ऊपर चढ़ गया। वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में ही 573 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिससे इस वर्ष भी आंकड़ों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।
महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। वर्ष 2016 में जहां 405 मामले दर्ज हुए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 521 तक पहुंच गई। इसके अलावा महिलाओं के अपहरण और बहला-फुसलाकर ले जाने के मामलों में भी सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो कानून व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
दुष्कर्म के मामले सबसे बड़ी चिंता
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दुष्कर्म के मामले सबसे अधिक चिंता पैदा कर रहे हैं। वर्ष 2016 में प्रदेश में 244 रेप के मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर 360 तक पहुंच गई। वर्ष 2025 में 397 मामलों के साथ यह आंकड़ा दशक के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। वहीं वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में ही 113 दुष्कर्म के मामले दर्ज हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक मूल्यों और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में सरकार, पुलिस और समाज को मिलकर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।






