सीनियर अफसर ने पत्नी और जूनियर अधिकारी का जबरन रिकार्ड किया अश्लील वीडियो, हाईकोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी के दबाव में कोई गलत कार्य करता है, तो उसे सेवा से बर्खास्त करना अत्यधिक कठोर और भेदभावपूर्ण सजा माना जाएगा। अदालत ने एक जूनियर अधिकारी की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उसकी सजा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) में बदलने के आदेश दिए हैं। यह फैसला हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने सुनाया।
सीनियर अधिकारी की भूमिका को माना गंभीर
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट है कि संबंधित सीनियर अधिकारी ने अपने जूनियर अधिकारी को गलत कार्य करने के लिए दबाव डाला था। जांच में यह भी सामने आया कि पूरे घटनाक्रम में वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका गंभीर रूप से स्थापित हुई थी। इसके बावजूद वरिष्ठ अधिकारी को केवल दो वर्षों के लिए वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने की सजा दी गई, जबकि जूनियर अधिकारी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। अदालत ने इसे सेवा कानून के सिद्धांतों के विपरीत और भेदभावपूर्ण करार दिया।
अश्लील वीडियो बनाने के आरोप भी साबित
कोर्ट ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि वरिष्ठ अधिकारी को लैपटॉप की सहायता से अपनी पत्नी और जूनियर अधिकारी के बीच अश्लील वीडियो बनाने तथा उसकी रिकॉर्डिंग की सीडी तैयार करने से जुड़े आरोपों में दोषी पाया गया था। इसके अलावा, उसने अपने अधीनस्थ कर्मचारी को अनुचित कार्य करने के लिए मजबूर किया था, यह आरोप भी जांच में सिद्ध हुआ।
पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के बयान का भी उल्लेख किया गया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति ने उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे शराब पिलाई और अपने जूनियर अधिकारी के साथ संबंध बनाने के लिए दबाव डाला। महिला के अनुसार इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई और उसे किसी को जानकारी न देने की चेतावनी दी गई थी। साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने कहा कि यदि किसी अनुचित संबंध की स्थिति बनी, तो उसके लिए उकसाने और परिस्थितियां पैदा करने वाला स्वयं वरिष्ठ अधिकारी था। ऐसे में केवल जूनियर अधिकारी को सबसे कठोर सजा देना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवा से बर्खास्तगी जैसी सजा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं थी। इसलिए न्याय के हित में अपीलकर्ता की बर्खास्तगी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) में परिवर्तित करना अधिक संतुलित और उचित समाधान है।






