विमल नेगी मौत मामला: पत्नी की राज्यपाल से गुहार, IAS हरिकेश मीणा और देसराज पर कार्रवाई की मांग
हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने मामले में दो अधिकारियों हरिकेश मीणा और देसराज के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। सोमवार को उन्होंने हिमाचल जनजातीय लोक अधिकार महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी मांगों से अवगत कराया।
किरण नेगी ने कहा, "केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में हरिकेश मीणा और देसराज के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। इसके बावजूद दोनों अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मामले में कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है, जिससे परिवार को न्याय मिलने में बाधा आ रही है"।
किरण नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान शिमला पुलिस ने सबूत मिटाने की कोशिश की है। इस संबंध में भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। किरण नेगी ने कहा कि परिवार जल्द ही हरिकेश मीणा और देसराज के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर CBI को अलग से शिकायत सौंपेगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्रीय एजेंसी मामले में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगी। परिवार ने राज्यपाल से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और विमल नेगी प्रकरण में न्याय दिलाने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने की मांग की।
HPPCL पूर्व चीफ इंजीनियर विमल नेगी 10 मार्च 2025 को लापता हो गए थे। उनका शव 18 मार्च को बिलासपुर स्थित गोबिंदसागर झील से बरामद हुआ था। विमल नेगी के लापता होने के बाद उनकी पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पावर कॉरपोरेशन के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (एमडी) हरिकेश मीणा, निदेशक देशराज और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर उनके पति को प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद 19 मार्च की रात सरकार ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करवाई।
विमल नेगी की पत्नी की शिकायत पर न्यू शिमला पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया, जिसमें तत्कालीन एमडी और निदेशक को कथित तौर पर आरोपी बनाया गया। इसी दिन सरकार ने HPPCL के तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा और निदेशक देशराज को उनके पदों से हटा दिया। हालांकि, पुलिस जांच से असंतुष्ट विमल नेगी के परिजनों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की मांग करते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया। परिवार की याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए।






