हिमाचल में पर्यटकों का सैलाब: शिमला में जून में अब तक 3.8 लाख वाहनों की एंट्री, सड़कों पर बढ़ा ट्रैफिक का दबाव
शिमला। देश के मैदानी राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक इन दिनों हिमाचल प्रदेश का रुख कर रहे हैं। इसका असर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली, कुफरी, नारकंडा और कसौली में साफ दिखाई दे रहा है। सैलानियों की बढ़ती आमद से जहां पर्यटन कारोबार को नई रफ्तार मिली है, वहीं सड़कों पर बढ़ता ट्रैफिक स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राजधानी शिमला में जून माह के शुरुआती दिनों में ही करीब 3.8 लाख वाहनों की आवाजाही दर्ज की जा चुकी है। वहीं मई महीने के दौरान शिमला के प्रमुख प्रवेश मार्गों शोगी, बिलासपुर और किन्नौर की ओर से लगभग 8.5 लाख वाहनों का आवागमन रिकॉर्ड किया गया। भारी संख्या में वाहनों के कारण शहर के कई हिस्सों में लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा फायदा पर्यटन उद्योग को मिल रहा है। कुल्लू-मनाली के होटल, होम-स्टे और रिसॉर्ट्स एडवांस बुकिंग के चलते लगभग पैक चल रहे हैं। होटल व्यवसायियों का कहना है कि इस सीजन में पर्यटकों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे पर्यटन कारोबार में जबरदस्त उछाल आया है।
बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शिमला पुलिस ने व्यापक प्रबंध किए हैं। वर्ष 2025 में जहां यातायात व्यवस्था संभालने के लिए 127 पुलिस और होमगार्ड कर्मी तैनात थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़ाकर 210 कर दी गई है। इसके अलावा लगभग 70 अतिरिक्त पुलिस कर्मियों को भी शहर में तैनात रखा गया है।
यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए 32 ट्रैफिक बाइक राइडर्स, इंटरसेप्टर वाहन और करीब 50 स्वयंसेवकों को भी विभिन्न स्थानों पर लगाया गया है। शिमला शहर को पांच अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जा रही है और प्रत्येक सेक्टर की जिम्मेदारी एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है।
एसपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि शिमला पुलिस पर्यटकों का स्वागत करती है, लेकिन सभी से यातायात नियमों का पालन करने, निर्धारित पार्किंग स्थलों का उपयोग करने और पुलिस द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की अपील की गई है, ताकि शहर की यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचने के साथ आने वाले दिनों में पर्यटकों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन और पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था को बनाए रखने और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की होगी।






