39 मांगें... क्या मिलेगा समाधान? शिक्षकों की सरकार से बड़ी उम्मीदें!
हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की मांग अब और तेज हो गई है। राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के सामने 39 सूत्रीय मांग-पत्र रखकर शिक्षकों की वर्षों पुरानी समस्याओं को उठाया है। सबसे बड़ी मांग है कि नेट, सेट और पीएचडी जैसी उच्च योग्यताएं रखने वाले स्कूल शिक्षकों को कॉलेज कैडर में 25 फीसदी आरक्षण दिया जाए। पदोन्नति, वेतन, तबादले, गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत और सीबीएसई स्कूलों में नियुक्तियों जैसे मुद्दों को लेकर शिक्षकों ने सरकार से ठोस फैसले की उम्मीद जताई है।
प्रदेश सचिवालय में शनिवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और राजकीय अध्यापक संघ के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रदेशभर से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से रखा।
करीब 70 शिक्षकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने की। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान जरूरी है। बैठक में सबसे प्रमुख मांग कॉलेज शिक्षा विभाग में सहायक आचार्य यानी प्रवक्ता पदों पर स्कूल शिक्षकों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित करने की रही।
अध्यापक संघ का कहना है कि प्रदेश के कई शिक्षक नेट, सेट और पीएचडी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं रखते हैं, लेकिन उनके लिए कॉलेज कैडर में आगे बढ़ने के अवसर बेहद सीमित हैं। ऐसे में योग्य शिक्षकों को उनके अनुभव और शैक्षणिक उपलब्धियों के अनुरूप अवसर मिलने चाहिए। संघ का मानना है कि इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों को भी अनुभवी और योग्य शिक्षक मिलेंगे।
राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार के समक्ष कुल 39 मांगें रखीं। इनमें लंबित पदोन्नतियों को शीघ्र पूरा करने, एसीपी लाभ बहाल करने, वेतन एरियर जारी करने और महंगाई भत्ते के बकाया भुगतान जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। शिक्षकों ने कहा कि कई मामलों में वर्षों से फाइलें लंबित पड़ी हैं, जिससे कर्मचारियों में निराशा का माहौल है। यदि इन मामलों का समयबद्ध समाधान किया जाए तो शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।
सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्तियों का मुद्दा भी बैठक में प्रमुखता से उठा। संघ ने मांग की कि इन स्कूलों में नियुक्तियां पूरी तरह मेरिट के आधार पर की जाएं ताकि योग्य और अनुभवी शिक्षकों को अवसर मिल सके। इसके साथ ही टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने और लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत देने की मांग भी रखी गई।
बैठक में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। संघ का कहना है कि शिक्षकों पर पहले ही पढ़ाई, परीक्षा, रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यों का भारी बोझ है।
ऐसे में जनगणना, सर्वेक्षण और अन्य सरकारी कार्यों में उनकी लगातार ड्यूटी लगाए जाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसलिए विद्यालय समय के दौरान शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखा जाना चाहिए।
ट्रांसफर नीति को लेकर भी अध्यापक संघ ने सरकार के सामने कई सुझाव रखे। संघ ने वर्तमान 30 किलोमीटर की दूरी सीमा को घटाकर 15 किलोमीटर करने की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था के कारण कई कर्मचारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उन्हें व्यक्तिगत और पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा प्रदेश में लागू तबादला बैन को हटाने और स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं व्यावहारिक बनाने की मांग भी उठाई गई।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षकों द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जुलाई के पहले सप्ताह में शिक्षा विभाग और अध्यापक संघ के बीच संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए। वहीं अब हजारों शिक्षक जुलाई में होने वाली बैठक की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।
"कॉलेज कैडर में 25 फीसदी कोटे की मांग हो, पदोन्नतियों का मामला हो या फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत की बात... शिक्षकों ने अपनी समस्याओं को सरकार के सामने खुलकर रखा है। अब देखना होगा कि जुलाई में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक शिक्षकों के लिए राहत लेकर आती है या फिर ये मांगें एक बार फिर आश्वासनों तक सीमित रह जाती हैं।






