HPTDC में खर्चों पर कैंची, अधिकारियों की विशेष सुविधाएं खत्म; 147 करोड़ के घाटे से उबारने की कवायद
शिमला। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने घाटे में चल रहे हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के अधिकारियों और निदेशक मंडल के सदस्यों को मिलने वाली कई विशेष सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। सरकार ने निगम प्रबंधन के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह निर्णय लिया है, जिससे निगम के अनावश्यक खर्चों में कमी लाने और उसकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में पर्यटन विकास निगम लगभग 147 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहा है। ऐसे में सरकार निगम को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब निगम के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रबंध निदेशक (एमडी) तथा सरकारी और गैर-सरकारी निदेशक मंडल सदस्यों को मिलने वाली कई रियायतों पर रोक लगा दी गई है।
अब तक निगम के शीर्ष अधिकारियों को HPTDC होटलों में मात्र 100 रुपये प्रतिदिन के शुल्क पर ठहरने की सुविधा प्राप्त थी। इसके अलावा भोजन पर 50 प्रतिशत तक की छूट भी दी जाती थी। हैरानी की बात यह थी कि सेवानिवृत्ति के बाद भी ये सुविधाएं जारी रहती थीं। लेकिन सरकार के नए फैसले के बाद अब ये सभी विशेषाधिकार समाप्त कर दिए गए हैं।
इतना ही नहीं, निदेशक मंडल के सरकारी और गैर-सरकारी सदस्यों को बैठकों के दौरान HPTDC होटलों में मिलने वाली मुफ्त आवास और भोजन सुविधा भी वापस ले ली गई है। इसके अलावा प्रबंध निदेशक के पुत्र या पुत्री के विवाह समारोह के अवसर पर आवास, भोजन और परिवहन पर मिलने वाली विशेष छूट को भी समाप्त कर दिया गया है।
सरकार ने निदेशकों को जीवनभर होटल आवास और भोजन पर मिलने वाली 30 प्रतिशत रियायत भी खत्म कर दी है। हालांकि, इस फैसले का असर केवल अधिकारियों और बोर्ड सदस्यों पर पड़ेगा। निगम के कर्मचारियों को होटलों में मिलने वाली मौजूदा रियायतें पहले की तरह जारी रहेंगी।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से पर्यटन निगम के अनावश्यक खर्चों में कमी आएगी और उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार के इस फैसले को वित्तीय अनुशासन और सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






