गांववासी बोले : लोक निर्माण विभाग को कई बार अवगत करवाने के बावजूद नहीं हुआ समाधान
ढरांगण गांव में नाले के उफान से दो से अढ़ाई कनाल उपजाऊ भूमि हर साल होती है बर्बाद
चौहार घाटी की बरोट पंचायत के ढरांगण गांव में भारी बारिश के दौरान गांव के बीच से बहने वाले छोटे नाले का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष ग्रामीणों की दो से अढ़ाई कनाल उपजाऊ जमीन बर्बाद हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्राम सुधार कमेटी ढरांगण के अध्यक्ष अनिल कुमार ने बताया कि नाले का पानी बरोट–घटासनी सड़क मार्ग से होकर उहल नदी में मिलता है। लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के नीचे पाइपें लगाई गई हैं, लेकिन भारी बारिश में उनमें लकड़ी-पत्थर फंस जाते हैं, जिससे पानी खेतों में घुस जाता है। ग्रामीणों की जमीन में बार–बार पानी घुसने से फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं। 2017–18 में भी इसी कारण दो से अढ़ाई कनाल जमीन को नुकसान हुआ था। इस वर्ष 28 फरवरी को भी यही स्थिति दोहराई गई।
खुद हटाते हैं मलबा, पाइपें नहीं निकाल पातीं पानी
ग्रामीणों ने बताया कि पाइपों में रुकावट आने पर उन्होंने खुद ही मिट्टी, लकड़ी और पत्थर हटाकर पानी की निकासी की। लेकिन यह अस्थायी उपाय है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से बार–बार गुहार लगाई, मगर न तो अतिरिक्त पाइप डाले गए और न ही पुली का निर्माण किया गया। नाले में आने वाले बाढ़ के पानी के लिए सड़क के नीचे दो–दो पाइपें या पुली बनाई जा रही है। भारी बरसात से पहले स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उपजाऊ जमीन और फसलें बच सकें।
गांववासियों में रोष, समाधान न होने पर प्रदर्शन की चेतावनी
अनिल कुमार, प्यार चंद, सुभाष ठाकुर, प्रेम कुमार, मनोज कुमार, राजिंद्र कुमार, हल्कू राम सहित समस्त ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे पीडब्ल्यूडी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे।












